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बदले माहौल पर कांग्रेस कार्यसमिति में चर्चा आज

पंकज कुमार पांडेय | Sep 25, 2012, 07:31AM IST
 
 


नई दिल्ली.  केंद्र सरकार के कड़े फैसलों के विरोध में समर्थन वापसी कर अपने छह सांसदों को मंत्री पद गंवाने के लिए मजबूर करने वाली ममता बनर्जी को बड़ा झटका लग सकता है। कोलकाता में इस बात की चर्चा गरम है कि तृणमूल कांग्रेस के असंतुष्‍ट सांसद पार्टी से अलग हो सकते हैं। इन सांसदों के नाम  सौगत राय, सोमेन मित्र, अंबिकेश बनर्जी, कबीर सुमन और रत्‍ना डे नाग बताए जा रहे हैं। हालांकि यह साफ नहीं है कि अगर ये सांसद तृणमूल छोड़ते हैं तो कांग्रेस में शामिल होंगे या अपनी अलग पार्टी बनाएंगे। ममता बनर्जी ने जब केंद्र सरकार से समर्थन वापसी का फैसला लिया था, तब भी ऐसी खबर आई थी कि उन्‍हें अपने कुछ सांसदों को मंत्री पद से इस्‍तीफा देने के लिए मनाने में काफी मशक्‍कत करनी पड़ी थी। 




उधर, केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाओं में द्रमुक का पेंच सुलझा नहीं है। द्रमुक का भीतरी झगड़ा और मंत्रिमंडल में मलाईदार पदों को लेकर उसकी दावेदारी पर कांग्रेस में अभी पूरी सहमति नहीं बन पाई है। (पढ़ें, किन 15 नामों पर रहेगी नजर)




लिहाजा द्रमुक ने संकेत दिया है कि वह अपने कोटे के पद खाली रखने को कहेगी। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने द्रमुक को अपना मैसेज दिया है। ए राजा और दयानिधि मारन के इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर कांग्रेस द्रमुक को मंत्रिमंडल में भागीदारी देना चाहती है, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मंत्रालय द्रमुक को देने के पक्ष में कांग्रेस नहीं है। कांग्रेस की इच्छा यह भी है कि यूपीए को मजबूती देने के लिहाज से अगर कुछ नए दल सरकार में शामिल हों तो यह बेहतर होगा। इसके लिए आंध्र प्रदेश में टीआरएस पर सरकार की नजर है। (इसे भी पढ़ें :  मोदी की राजनीति बनाम स्वामी विवेकानंद की राष्‍ट्रनीति)




तेलंगाना को लेकर चल रही मशक्कत, तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के बाद की स्थिति और  रिटेल में एफडीआई समेत कई आर्थिक सुधारों की पहल के बीच दस जनपथ पर आज कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई। बैठक में केंद्र के हालिया फैसलों पर कांग्रेस पार्टी ने मुहर लगा दी। कांग्रेस प्रवक्‍ता जर्नादन द्विवेदी ने बैठक के दौरान उठाए गए मसलों की जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि बैठक में रिटेल में एफडीआई सहित हाल में सरकार की तरफ से लिए फैसले का पार्टी ने एकजुट होकर समर्थन किया है। ( इसे भी पढ़ें :  इन 5 कारणों से मोदी बन सकते हैं बीजेपी के लिए खतरा)
 
 
 

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