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बलात्‍कारियों का केस नहीं लड़ेंगे वकील, कमिश्‍नर को नोटिस

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नई दिल्‍ली। दिल्‍ली की साकेत कोर्ट के वकीलों ने गैंग रेप के आरोपियों का केस नहीं लड़ने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय की स्‍थायी संसदीय समिति ने दिल्‍ली पुलिस के कमिश्‍नर नीरज कुमार, स्‍पेशल कमिश्‍नर धर्मेन्‍द्र कुमार सहित आला अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए समिति के सामने पेश होने को कहा है। समिति की चार जनवरी को बैठक होनी है। उम्‍मीद है कि पुलिस के आला अधिकारियों से गैंग रेप की वारदात के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर सवाल पूछे जाएंगे। इस बैठक में पुलिस कमिश्‍नर उन सवालों का लिखित जवाब देंगे, जिनका बीते 27 दिसंबर को हुई समिति की बैठक में जवाब नहीं दे सके थे।
 
16 दिसंबर की रात दिल्‍ली में चलती बस में गैंगरेप की शिकार पैरामेडिकल छात्रा और उसके दोस्त को बदमाशों ने बस से कुचलने की भी कोशिश की थी। दुष्कर्मियों ने छात्रा का मोबाइल और पर्स भी छीन लिया था। पुलिस जांच में इसका पता चला है। छात्रा के दोस्त ने लड़की को बस के आगे से खींचकर उसे बचा लिया था। पुलिस ने चार्जशीट तैयार कर ली है। वीरवार को इसे कोर्ट में पेश किए जाने की उम्मीद है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रेप, हत्‍या, हत्‍या की कोशिश के साथ डकैती की धारा भी जोड़ी है। गोपनीयता बनाए रखने के लिए पुलिस ई-चार्जशीट फाइल करने की तैयारी में है।
 
इधर, इस केस को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। इस मामले के बाद किरकिरी झेल रहीं दिल्‍ली की मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित ने बुधवार को शांति मार्च निकाला। बाल भवन से राजघाट तक यह मार्च निकाला गया। राजघाट पर मार्च शोकसभा में तब्‍दील हो गया। कुछ दिनों पहले मुख्‍यमंत्री जंतर मंतर भी पहुंचीं थीं लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनका घेराव कर उन्‍हें वहां से बैरंग लौटने के लिए विवश कर दिया था। लेकिन आज दिल्‍ली महिला आयोग के बैनर के तहत होने वाले मार्च में 'दामिनी' की आत्‍मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाएगी। दिल्‍ली बीजेपी ने पीएम मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखकर गैंग रेप की शिकार लड़की को अशोक चक्र दिए जाने की मांग की है। यह अवॉर्ड जंग के अलावा शौर्य, बहादुरी और बलिदान के लिए दिया जाता है।
 
आज के मार्च के लिए शीला दीक्षित के दफ्तर की ओर से काफी तैयारियां की गई थीं। मीडिया को इसके कवरेज के लिए एक दिन पहले ही न्‍यौता भेज दिया गया था। इसमें 'इम्‍पोर्टेंट इन्‍वाइट' लिख कर 'उचित कवरेज' देने का आग्रह किया गया है (देखें मीडिया को भेजा गया इन्‍वाइट) और दावा किया गया कि मार्च में 8000 महिलाएं शामिल होंगी। 
 
मार्च में बड़ी संख्‍या में महिलाएं शामिल हुईं, लेकिन उनका कहना था कि वह सरकार के साथ मोर्चा निकालने के लिए नहीं आई हैं, बल्कि अपने दम पर मार्च निकाल रही हैं। उन्‍होंने सवाल उठाया कि सरकार मार्च निकालने के बजाय एक्‍शन क्‍यों नहीं ले रही है? 16 दिसंबर को गैंगरेप की घटना के बाद भी दिल्‍ली में बलात्‍कार के कई मामले सामने आ चुके हैं।
 
फोटो: मंगलवार को बलिया में गंगा में 'दामिनी' की अस्थियां विसर्जित करते परिजन।

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क्‍या सीएम को मोर्चा लेकर सड़क पर उतरना चाहिए या फिर दफ्तर में बैठ कर बलात्‍कारियों पर कड़ा एक्‍शन सुनिश्चित करना चाहिए..आप बताएं


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