पिता ने यह भी बताया कि बेटी के साथ जो लड़का था वह उसका ब्वॉयफ्रेंड नहीं, बल्कि अच्छा दोस्त था। उन्होंने कहा, 'हम अलग जाति के हैं। इसलिए शादी का सवाल ही नहीं था। वैसे भी, बेटी ने कभी शादी की इच्छा नहीं जताई थी। वह पहले नौकरी करना चाहती थी। उसका सपना डॉक्टर बनने का और पैसे कमा कर विदेश जाने का था।' उन्होंने बेटी की पढ़ाई के लिए जमीन तक बेच दी थी। बेटी के सपनों के बारे में बात करते हुए आज भी पिता की आंखें चमक उठती हैं। ये सपने तो अब मर गए पर 'दामिनी' के पिता को यह उम्मीद है कि अब हर मां-बाप अपने बेटों को औरतों का सम्मान करना सिखाएंगे।