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रेप का आरोपी बरी, मीडिया ट्रायल पर फैसला नहीं सुनाएगी अदालतें

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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली की एक अदालत ने 2010 में एक लड़की के अपहरण और उसके साथ रेप के मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने साथ ही कहा है कि कथित पीडिता के बयान 'भरोसा करने लायक नहीं' हैं और अदालतें मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर फैसला नहीं दे सकती हैं। एडिशनल सेशन जज निवेदिता अनिल शर्मा ने कहा कि अदालत को कानून के दायरे में रहते हुए गवाहों के बयान के मद्देनजर फैसला करना होता है, जज्‍बातों या मीडिया की रिपोर्टिंग के आगे झुकते हुए नहीं।

सरकार नाबालिग की उम्र सीमा घटाने पर विचार कर रही है। सभी राज्‍यों के पुलिस महानिदेशकों के साथ बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, 'महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार कड़े कानून बना रही है। कड़े कानून के लिए लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। शिंदे ने कहा कि महिलाओं से जुड़े अपराधों की जांच तेजी से होगी। थाने में महिला कांस्‍टेबलों की संख्‍या बढ़ेगी। दिल्‍ली में हर थाने में दो महिला एसआई और 10 कांस्‍टेबल तैनात होंगी।
 
16 दिसंबर की रात चलती बस में जिस लड़की का गैंगरेप हुआ था, उसके साथ सबसे ज्‍यादा दरिंदगी करने वाला आरोपी खुद को नाबालिग बता रहा है। इसी वजह से गुरुवार को उसके खिलाफ चार्जशीट भी दायर नहीं की जा सकी। अभी बोन डेंसिटी टेस्‍ट की रिपोर्ट आएगी। इससे पता चलेगा कि क्‍या वह वाकई नाबालिग है। इसके बाद उस पर अलग से चार्जशीट दायर की जाएगी। लेकिन दिल्‍ली पुलिस के सूत्रों की मानें तो 'दामिनी' के साथ हुई वारदात में उस 'नाबालिग' ने ही सबसे खौफनाक हरकत की थी। बताया जाता है कि उसने दो बार बलात्‍कार किया था और उसकी आंत पर वार भी किया था। उसे चलती बस से फेंकने की सलाह भी उसी ने दी थी।
 
दिल्ली गैंगरेप घटना के 18वें दिन पैरामेडिकल छात्रा से दुष्कर्म मामले में दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को चार्जशीट दाखिल की है। अभी राम सिंह, मुकेश, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है। अगली सुनवाई साकेत के फास्ट ट्रैक कोर्ट में पांच जनवरी से होगी। (रेप से बचने के लिए चलती ट्रेन से कूदी महिला
 
चार्जशीट दाखिल करते समय अदालत में कुछेक मौकों पर खासा ड्रामा भी हुआ। पुलिस ने गुरुवार को कोर्ट बंद होने से महज पांच मिनट पहले मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सूर्य मलिक ग्रोवर के सामने चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई से पहले अदालत कक्ष को भीतर से बंद देखकर वकीलों ने हंगामा मचाया। इसके बाद कक्ष खोला गया। मजिस्ट्रेट ने पूछा कि पुलिस इतनी देर से चार्जशीट क्यों फाइल कर रही है। पुलिस का जवाब था कि बड़ी संख्या में दस्तावेज और कागजात तैयार करने के कारण देरी हुई। पुलिस ने आरोपियों को भी अदालत में पेश नहीं किया। सुरक्षा पहलुओं को इसका कारण बताया गया। ड्रामा तब बढ़ गया जब एक महिला वकील ने आगे आकर आरोपियों की वकालत करने की पेशकश की। इस पर अभियोजन पक्ष ने आपत्ति की। एक अन्य युवा वकील ने आरोपियों को कानूनी सहायता मुहैया करवाने को कहा। अदालत वैसे भी आरोपियों को वकील मुहैया करेगी। 
 
दस्तावेज आम नहीं करने की अर्जी 
 
दिल्ली पुलिस ने फिलहाल 33 पेज की ऑपरेटिव चार्जशीट दाखिल की है। इसमें नाबालिग आरोपी की भी करतूत गिनाई गई है। कहा गया है कि वही पूरी घटना का सूत्रधार है। आरोप पत्र बंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपा गया है। साथ ही पुलिस ने दस्तावेज आम नहीं करने और सुनवाई बंद कमरे में करने की अर्जी लगाई है। 
 

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