नई दिल्ली. दिल्ली में
मेडिकल छात्रा से गैंगरेप पर जहां
सड़क से संसद तक उबाल है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मार्कन्डेय काटजू की नजर में यह इस मुद्दे पर जरूरत से ज्यादा हंगामा है। काटजू ने अपने ब्लॉग 'सत्यम ब्रूयात' में लिखा है कि दिल्ली गैंग रेप को जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है। देश में कई ऐसे मुद्दे हैं जिस पर इस केस से ज्यादा बहस की जरूरत है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मैं इस घटना की घोर निंदा करता हूं। मेरा मानना है कि इस घटना के दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
काटजू का कहना है कि दिल्ली गैंगरेप को लेकर मीडिया और संसद में जबर्दस्त हंगामा है। लेकिन इस तरह की घटनाएं आम हैं, खासकर ग्रामीण भारत में। उन पर इतना शोर नहीं मचता। दिल्ली का मतलब पूरा भारत नहीं होता।
काटजू का कहना है पिछले 10-15 सालों में करीब 2.5 लाख किसानों ने खुदकुशी की है। यानी प्रतिदिन के हिसाब से 47 किसान। पर उनकी समस्याओं पर चर्चा कम ही होती है।
देश के 48 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। उन पर भी मीडिया और संसद में कम ही सुनने को मिलता है। देश में कुपोषण की यह दर सोमालिया और इथोपिया जैसे गरीब देशों से भी ज्यादा है।
बेरोजगारी देश की सबसे बड़ी समस्या है। इस पर बहुत कम चर्चा होती है। देश का गरीब तबका स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित है। मीडिया इसे मुद्दा नहीं बनाता। काटजू का कहना है कि दिल्ली गैंग रेप को बेवजह हाइप नहीं देना चाहिए।
काटजू ने यह भी लिखा है कि आईपीसी की धारा 376 के तहत बलात्कार के लिए अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। मुझे नहीं लगता कि इसके लिए फांसी की सजा की जरूरत है।
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