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पाकिस्‍तानी वैज्ञानिक खलील चिश्‍ती की किस्‍मत का फैसला आज

आशीष महर्षि, भास्कर डॉट कॉम | Dec 12, 2012, 09:51AM IST
पाकिस्‍तानी वैज्ञानिक खलील चिश्‍ती की किस्‍मत का फैसला आज
नई दिल्ली। पाकिस्‍तानी वैज्ञानिक डॉक्‍टर खलील चिश्‍ती को आज भारत की शीर्ष अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 82 साल के पाकिस्तानी वैज्ञानिक को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद चिश्ती के पाकिस्तान जाने का रास्ता साफ हो गया है। खलील चलने फिरने में लाचार हैं। चिश्ती को पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने पांच लाख रुपये के मुचलके पर पाकिस्तान जाने की अनुमति दे दी थी। 
 
अपनी रिहाई पर खुशी जताते हुए डॉक्‍टर खलील चिश्‍ती ने दैनिक भास्‍कर से कहा कि उन्‍हें हिंदुस्‍तान और यहां की सरकार से कोई शिकायत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनकी जिंदगी में एक नई आस जगाई है। डॉक्‍टर चिश्‍ती कहते हैं कि वह अब जल्‍दी से जल्‍दी अपने मुल्‍क पाकिस्‍तान लौटना चाहते हैं। 
 
खलील चिश्ती हत्‍याकांड के मुख्य आरोपी युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष फारूख चिश्ती के ताऊ हैं। खलील अपने रिश्तेदार की शादी में शामिल होने पाकिस्तान से आए थे। उनका वीजा 18 मई 1992 तक था। खलील और खुर्शीद के बीच वॉकिंग स्टिक टकराने पर विवाद हो गया था। इस मामूली विवाद ने ही बाद में गंभीर रूप अख्तियार कर लिया जिसमें एक की जान चली गई और कई घायल हो गए। 14 अप्रैल, 1992 को अजमेर के दरगाह क्षेत्र में मोहम्मद मियां उर्फ इदरीस की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अजमेर के गंज थाना पुलिस ने हत्या के आरोप में फारूख चिश्ती, खलील चिश्ती, यासिर और अकील के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। जिसके आधार पर चारों को उम्र कैद हुई थी। करीब 18 साल तक ट्रायल व डेढ़ साल तक जेल में रहने के बाद चिश्ती वतन लौटे थे। भारत-पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार है किसी कैदी को इस तरह रिहा किया गया था। 
 
 
खलील चिश्ती अपनी आजादी के लिए न्यायपालिका से लेकर राजस्थान के राज्यपाल और देश के प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक से खुद के लिए दया मांग चुके हैं। फिल्मकार महेश भट्ट सरकार से सवाल पूछ चुके हैं कि क्या भारत एक जीवित खलील चिश्ती को भेजेगा या उनके पार्थिव शरीर को, जब भी उनका इंतकाल हो? भट्ट कहते हैं कि भारत गौतम, महावरी, सूफी-संतों, गांधी का देश है। इसलिए डॉ. खलील चिश्ती को क्षमा करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
 
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