'ज़्यादातर डॉक्टर करवाते हैं फिजूल के टेस्ट'
नई दिल्ली. अगली बार जब आपका डॉक्टर आपको टेस्ट करवाने के लिए कहे, तो सवाल जरूर पूछिएगा कि क्या आपको वाकई इन टेस्ट की जरूरत है। एम्स ने दिल के 250 मरीजों के डॉक्टरों का पर्चा (प्रिसक्रिप्शन) के अध्ययन के बाद इस नतीजे पर पहुंचा है कि डॉक्टर बेवजह टेस्ट लिखते हैं और कई बार मरीज को ऐसी दवाएं लिखते हैं जो आउटडेटेड मानी जाती हैं। एम्स के क्लिनिकल एपिडेमियोलॉजी यूनिट के प्रमुख डॉ. कामेश्वर प्रसाद के मुताबिक, 'कई बार ऐसे मेडिकल टेस्ट लिख देते हैं, जिनकी जरूरत नहीं होती है। वहीं, ऐसे डॉक्टर वे दवाएं भी लिख देते हैं, जिनके फायदे साबित नहीं हुए होते हैं। जब तक खास बीमारियों के इलाज के लिए स्टैंडर्ड नहीं बनाया जाता, यह समस्या कायम रहेगी।' जल्द ही एम्स एक इंटरनेशनल सेमीनार का आयोजन कर इन मुद्दों पर जनजागरण की तैयारी कर रहा है।
यह समस्या भारत में ही नहीं है बल्कि अमेरिका जैसे देश में भी कई मरीजों को बिना जरूरत के इलाज किया गया है। एक स्टडी के मुताबिक अमेरिका में 14 फीसदी दिल के मरीजों को एंजियोप्लास्टी की जरूरत ही नहीं थी। लेकिन उनकी एंजियोप्लास्टी कर दी गई। इस मुद्दे पर मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक सेठ के मुताबिक, 'जो व्यक्ति सीने में दर्द या बहुत ज्यादा थकावट के बीना 500 मीटर पैदल चल सकता है, उसे एंजियोप्लास्टी की जरूरत नहीं होती है।'





