विज्ञापन
 
Home >> National >> Latest News >> National >> Dr. Gomti: 450 Had A Liver Transplant In 12 Years,

डॉ. गोमती: 12 साल में ट्रांसप्लांट कीं 450 लिवर, 750 किडनी

उपमिता वाजपेयी | Aug 12, 2012, 10:09AM IST
 
 


चेन्नई. मिलिए, ये हैं डॉ. गोमती नरसिम्हन। देश की उन चार महिला डॉक्टरों में शुमार जो लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट करती हैं। बारह साल के कॅरियर में उन्होंने 450 लिवर और 750 किडनी ट्रांसप्लांट किए हैं। डॉ. गोमती सदस्य हैं डॉ. मोहम्मद रेला के टीम की। डॉ. रेला का नाम लिवर सर्जरी के मामले में गिनीज बुक में दर्ज है। डा. गोमती केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख के इलाज में जुटी हैं। डॉ. गोमती ने उपमिता वाजपेयी से साझा किए कुछ चुनौतीपूर्ण केस और उनकी पेचीदगियां-

 

तीन किस्सों से जानिए लिवर ट्रांसप्लांट की जटिलता और सफलता

5 किलो की बच्ची का ऑपरेशन था चुनौती डॉ गोमती याद करती हैं अपने जीवन का अब तक का सबसे जटिल केस। 8 महीने की श्रीलंकाई बच्ची पूजानी जिसका वजन सिर्फ 5 किलो था। बड़ी चुनौती उम्र नहीं उसका कम वजन था। डॉक्टरों की टीम उलझन में थी कि उसका लिवर ट्रांस्प्लांट कैसे होगा। उसके अंग इतने छोटे थे कि कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह कुपोषण की शिकार थी। रिकवरी को लेकर भी डर था। हिम्मत कर ऑपरेशन किया गया। आज पुजानी ढाई साल की हो चुकी है। और पूरी तरह स्वस्थ है।

 

बेटी ने पिता को दिया तीन-चौथाई लिवर

22 साल की मंजूषा अग्रवाल के लिवर का 70 फीसदी हिस्सा डॉक्टरों ने पिता के शरीर में प्रत्यारोपित किया है। पिछले साल उसके पिता के लिवर में कैंसर का पता चला था। डॉक्टरों ने ट्रांस्प्लांट की सलाह दी। छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव के ताराचंद के तीन बच्चे हैं। तीनों में लिवर देने की होड़ लगी। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी थी, पिता उसकी मदद नहीं चाहते थे। बेटा वयस्क नहीं होने की वजह से कानूनी रूप से लिवर नहीं दे सकता था। पत्नी शारीरिक रूप से कमजोर थी। आखिर मंजूषा की जीत हुई। वे कहती हैं ऑपरेशन से जुड़े सारे खतरे उन्हें मालूम थे। अब 5 हफ्ते गुजर चुके हैं। उनका लिवर फिर से सामान्य काम करने लगा है।

 

जब लिवर इंटरचेंज किया

एक बार अजीब स्थिति भी बनी। एक पत्नी अपने पति को लिवर डोनेट करना चाहती थी। लेकिन उसका ब्लड ग्रुप मैच नहीं कर रहा था। उसी वक्त एक ऐसा केस आया जिसमें एक बेटा अपने पिता को लिवर देना चाहता था। पर उनका ब्लड ग्रुप भी आपस में मैच नहीं किया। मामला श्रीलंका के दो परिवारों का है। जामरीन अपने पिता मोहम्मद नजीर को लिवर देना चाहता था। जबकि फातिमा रमीजा अपने पति नजीम को। सौभाग्य से जामरीन का ब्लड ग्रुप नजीम और फातिमा का मोहम्मद नजीर से मैच कर गया। दोनों ट्रांसप्लांट एक ही वक्त पर सफलतापूर्वक किए गए।

 

22 साल की मंजूषा अग्रवाल के लिवर का 70 फीसदी हिस्सा डॉक्टरों ने पिता के शरीर में प्रत्यारोपित किया है। पिछले साल उसके पिता के लिवर में कैंसर का पता चला था। डॉक्टरों ने ट्रांस्प्लांट की सलाह दी। छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव के ताराचंद के तीन बच्चे हैं। तीनों में लिवर देने की होड़ लगी। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी थी, पिता उसकी मदद नहीं चाहते थे। बेटा वयस्क नहीं होने की वजह से कानूनी रूप से लिवर नहीं दे सकता था। पत्नी शारीरिक रूप से कमजोर थी। आखिर मंजूषा की जीत हुई। वे कहती हैं ऑपरेशन से जुड़े सारे खतरे उन्हें मालूम थे। अब 5 हफ्ते गुजर चुके हैं। उनका लिवर फिर से सामान्य काम करने लगा है।

 

सामान्यतया डोनर को कोई मुश्किल नहीं होती। 6 से 9 हफ्तों में उसका लिवर रिजनरेट कर फिर अपने पुराने स्वरूप में आ जाता है। सेहतमंद व्यक्ति के लिवर का 70 प्रतिशत हिस्सा निकाला जा सकता है। सर्जरी के 48 घंटे के भीतर लिवर नए शरीर में काम करना शुरू कर देता है। हफ्तेभर में यह नार्मल लिवर की शक्ल में आ जाता है।

 

लिवर डोनर की डिमांड काफी ज्यादा है। सप्लाय बेहद कम। इसकी वजह है भ्रम। लोगों को लगता है कि उनके पास एक ही लिवर है, ऐसे में वे उसे डोनेट कैसे कर सकते हैं। सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत मरीजों को ही लिवर मिल पाता है। 35 प्रतिशत लिवर ब्रैन डेड लोगों से मिलता है। लिविंग डोनर ज्यादातर रिश्तेदार होते हैं।

 
 
 

आपके विचार
 
 
कोड:
1 + 3

 
Ad Link
विज्ञापन
विज्ञापन
 
 
 
 
Sabse Bada Match Fixer Contest
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

क्रिकेट

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment