लाइफ: चरित्र को ऊंचा उठाइए प्रतिष्ठा खुद बढ़ जाएगी
चरित्र वह है जो आप हैं। प्रतिष्ठा वह है जो दूसरे आपके बारे में सोचते हैं। यदि आप अपने चरित्र का ध्यान रखते हैं तो आपकी प्रतिष्ठा अपना ध्यान खुद रखेगी। चरित्र ही इंसान है। प्रतिष्ठा परछाई है। आप परछाई को पकड़ते हैं। जब इंसान आगे बढ़ता है तो परछाई हाथ से फिसल जाती है। वहीं, यदि आप इंसान को पकड़ लेते हैं तो परछाई अपने आप पकड़ में आ जाएगी। चरित्र किसी मकसद या सिद्वांत से जुड़ा है। प्रतिष्ठा उस सिद्वांत का परिणाम है। जब आप किसी उद्देश्य के लिए काम करते हैं तो आप प्रभाव पर अपने आप काम कर रहे होते हैं। जब आप उद्देश्य को ऊंचा रखते हैं तो आप प्रभाव को भी बढ़ाते हैं।
अपने चरित्र को ऊंचा उठाइए, आपकी प्रतिष्ठा अपने आप ऊंची उठ जाएगी। चरित्र से जन्मी प्रतिष्ठा बदलते समय के साथ बनी रहती है। चरित्र के अभाव में जन्मी प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए न सिर्फ मेहनत करनी पड़ती है बल्कि कठिन समय के दौरान इसका पतन भी हो जाता है। कई धार्मिक गुरु कभी भगवान के समान माने जाते थे, वे कुछ समय बाद घोटालेबाज अपराधी माने जाने लगे। यह बिना चरित्र की नींव पर बनी प्रतिष्ठा का क्लासिकल मामला है।
यदि आप ध्यान देंगे कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या कहते हैं, क्या सोचते हैं तब आप जैसे हैं वैसे बने रहने से खुद को रोक देते हैं। सभी यशस्वी लोगों ने इस बात पर ध्यान दिया कि वे खुद के बारे में क्या सोचते हैं। उन्होंने उस पर काम किया, जिसे वे अपनी ताकत समझते थे।
उन्होंने अपने चरित्र की नींव बनाई, जिससे प्रतिष्ठा उनके चरणों में आ गई। आप अपने मूल्यों के लिए पहचाने जाने के बजाय जब ये इच्छा करते हैं कि भीड़ आपको पहचाने तो आप अपनी खुशियों की चाभी दूसरे के हाथ में दे देते हैं। यदि आप चाहते हैं कि हर कोई आपसे खुश रहे तो आप सुकून से नहीं रह सकेंगे। दुनिया आपके बारे में क्या सोचती है यह सोचना आपका काम नहीं है। आप सिर्फ अपना काम करिए। दुनिया का मुंह बंद करने का सबसे अच्छा तरीका है बेहतर परिणाम दें। अपने जीवन की चाभी को दुनिया से छुपा लें। दुनिया को यह बताने का साहस करें, 'मैं यह हूं। और मैं जो हूं, मुझे उस पर गर्व है।' सिर्फ अपने चरित्र पर ध्यान दें।






