फास्टफूड में कम होंगे नमक-चीनी
नई दिल्ली. फास्टफूड को स्वादिष्ट बनाने के लिए नमक और चीनी की मात्रा का ज्यादा इस्तेमाल करके आम लोगों की सेहत खराब कर रही कंपनियों पर जल्द केंद्र सरकार नकेल कस सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने कहा है कि जल्द भारत सरकार को डिब्बों और पैकेटों में बंद खाद्य उत्पादों से नमक और चीनी की मात्रा कम करने के दिशा-निर्देश जारी करने को कहा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि देश में गैर-संक्रामक रोगों के मामलों में भारी बढ़ोतरी हो रही है। ज्यादा नमक या चीनी का इस्तेमाल हाइपरटेंशन और मोटापे के लिए जिम्मेदार माना जाता है। भारत में डब्लूएचओ की प्रतिनिधि डॉ. नाटा मेनाब्डे ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में कहा, 'पूरी दुनिया में गैर-संक्रामक रोगों के खतरे को देखते हुए ज्यादातर देशों ने डिब्बाबंद खाद्य उत्पादों में नमक और चीनी की कम मात्रा इस्तेमाल पर करने का कानून लागू है।
लेकिन भारत में अभी भी इस ओर ज्यादा काम नहीं हो पाया है।' डॉ. नाटा ने कहा, 'हमने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से अनुरोध किया है कि देश में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे नमक और चीनी पर नियंत्रण की जरूरत है। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जल्द कदम उठाने का आश्वासन भी दिया है।'
स्वास्थ्य मंत्रालय में गैर-संक्रामक रोगों पर काम कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'देश में प्रति नागरिक औसतन 4-5 ग्राम नमक इस्तेमाल की आदत डलवाने का खाका पिछले साल तैयार हुआ है। लेकिन मतभेद के चलते अभी इसे लागू नहीं किया जा सका है।
अधिकारी ने आगे बताया कि नमक और चीनी के कम इस्तेमाल की शुरुआत खाने-पीने का उत्पादन से जुड़ी कंपनियों से किया जाना था। आलू के चिप्स, नमकीन-भुजिया, बर्गर और पिज्जा बनाने वाली बड़ी कंपनियों को कम नमक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करने की भी योजना है। लेकिन फिलहाल इस पर कोई प्रगति नहीं हो पाई है।








