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निर्मल बाबा को हो सकती है सात साल की जेल

dainikbhaskar.com | May 12, 2012, 11:29AM IST
 
 


नई दिल्ली/लखनऊ. लाल चटनी, समोसे या चॉकलेट खाने और ऐसी ही तमाम चीजों को गरीबों में बांटने जैसे अनोखे उपाय बताकर लोगों के दुख दूर करने का दावा करने वाले कथित धार्मिक गुरु निर्मल बाबा (निर्मलजीत सिंह नरुला)  की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लखनऊ सीजेएम कोर्ट के आदेश के बाद शनिवार को लखनऊ के गोमती नगर थाने में निर्मल बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर की बेटी तान्या ठाकुर (कक्षा बारह की छात्रा) और बेटे आदित्य (कक्षा दस के छात्र) के आवेदन पर निर्मल बाबा के खिलाफ धारा  417, 419, 420 आईपीसी के तहत धोखाधड़ी व अन्य आरोपों और धारा 508 (ईश्वरीय नाराजगी का भय दिखा कर गलत लाभ लेना) के तहत एफआईआर दर्ज हुई है। एफआईआर दर्ज होने पर निर्मल बाबा की तरफ से प्रतिक्रिया भी आ गई है। निर्मल बाबा के प्रवक्ता अशोक मेहता ने एफआईआर दर्ज होने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि केस दर्ज कराने वालों को भगवान का डर होना चाहिए। निर्मल बाबा के वकील अमन लेखी ने कहा है कि यह कानून का दुरुपयोग है।
 
 
अगर निर्मल बाबा के खिलाफ आरोप साबित होते हैं तो उन्हें विभिन्न धाराओं के तहत सात साल तक की जेल हो सकती है।  गौरतलब है कि तान्या और आदित्य ने 10 अप्रैल 2012 को थाना गोमतीनगर, लखनऊ में एफआईआर के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। लेकिन जब थाने ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया तो दोनों बच्चों ने  लखनऊ के एसएसपी/डीआईजी आशुतोष पांडेय और एडीजी, लॉ ऑर्डर से भी गुहार लगाई। लेकिन जब इन दोनों स्तरों पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई तो दोनों बच्चों ने धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत याचिका दायर करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
 
दोनों बच्चों की याचिका पर फैसला सुनाते हुए बीते बुधवार को सीजेएम, लखनऊ राजेश उपाध्याय ने गोमती नगर थाने को आदेश दिया था कि दिल्ली में रहने वाले कथित धार्मिक गुरु निर्मल बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच की जाए। कोर्ट ने यह आदेश तान्या और आदित्य द्वारा धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत पेश याचिका पर दिया था। सीजेएम, लखनऊ ने अपने आदेश में कहा था कि तान्या और आदित्य की तरफ से पेश आवेदन पर संज्ञेय अपराध बनता है और पर्याप्त आधार है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के श्री भगवन बनाम आंध्र प्रदेश सरकार मामले का भी उल्लेख अपने आदेश के दौरान किया जिसमें इसी प्रकार से एक कथित धार्मिक व्यक्ति द्वारा बच्ची के इलाज़ में ठगी की जा रही थी।

 
 
 

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