आज एक ओर जहां आईआईटी-आईआईएम की डिग्री को मोटी तनख्वाह वाली नौकरियों का पासपोर्ट माना जा रहा है वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं जो वर्ल्ड क्लास के इन संस्थानों से निकलने के बाद नौकरी तो की लेकिन उन्होंने यह जिंदगी रास नहीं आई और उन्होंने जिंदगी जीने के लिए बिल्कुल अलग राह चुनी। आइए ऐसे ही चार शख्सीयत पर नजर डालते हैं : -
प्रेम दास राय: प्रेमदास राय सिक्किम के पहले व्यक्ति हैं, जो आईआईटी से ग्रेजुएशन के बाद सांसद भी बने। साधारण परिवार में जन्मे प्रेमदास की बुद्धिमत्ता को बचपन में सिक्किम के राजा ने पहचाना और प्रसिद्ध दून स्कूल भेजा।
आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें बैंक ऑफ अमेरिका में नौकरी मिली। लेकिन मन से सिक्किम नहीं छूट रहा था। लौट आए। 80 के दशक में कंप्यूटर इंस्टीट्यूट खोला। राज्य में कंप्यूटर लेकर आने वाले वे पहले व्यक्ति थे। वे राजनीति और समाजसेवा भी करना चाहते थे। पिता की तरह, जो सिक्किम के छात्र नेता रहे। 1993 में पवन चामलिंग ने नई पार्टी बनाई तो प्रेमदास उनसे जुड़ गए। इसी के साथ उन्होंने पहाड़ों पर खेती और बागवानी की तकनीक को बेहतर बनाया। 2006 तक 1500 युवाओं को इसकी ट्रेनिंग भी दी। उनकी टीम में टेक्नोलॉजी के जानकार पांच लोग हैं, जो उन्हें नीतियां बनाने में मदद करते हैं। इससे वे समाज कल्याण के लिए जनता और विशेषज्ञों की भागीदारी जुटा पाते हैं।
'छात्र-छात्राओं को सिर्फ इंजीनियर बनने की ही प्रेरणा नहीं देनी चाहिए। उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदारी को भी समझाना चाहिए।'
-प्रेमदास राय
नासा की नौकरी छोड़कर फिल्मों से दिल लगा बैठे इंजीनियर के बारे में आगे पढ़िए:
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