देवब्रत पेन को फिल्म ‘चटगांव’ के निर्देशक के रूप में ख्याति मिली। जो पिछले साल के आखिर में रिलीज हुई लेकिन दुनिया उन्हें ऐसे टैक्नीशियन के रूप में जानती है, जिसने फोटोग्राफी की दुनिया ही बदल दी। उन्होंने ही 1995 में दुनिया का सबसे छोटा कैमरा बनाया जो अब हर मोबाइल फोन से लेकर स्पेस टेलिस्कोप में लगता है।
87 पेटेंट हासिल करने वाले पेन के फिल्म डायरेक्टर बनने की कहानी दिलचस्प है। देवब्रत कहते हैं मुझे शुरू से परफॉर्मिंग आर्ट का शौक था। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में रिसर्च के दौरान हॉस्टल से भागकर यूनिवर्सिटी का थिएटर देखते। मन करता था पीएचडी खत्म ही न हो और थिएटर यूं ही चलता रहे। रिसर्च पूरी होने के बाद नासा में नौकरी की। उन्होंने 15 साल में सैकड़ों इनोवेशन किए, लेकिन मन में कहीं न कहीं थिएटर था। 2008 में नासा की नौकरी छोड़ दी। सारा अनुभव सिनेमैटोग्राफी तक सीमित कर लिया और यहीं से फिल्म निर्देशन का आइडिया आया। अपनी फिल्म के सेट पर 300 फिल्में देखीं और चटगांव बना दी।
'पहले इंजीनियरिंग में दाखिले से ही साबित होता था कि आप अच्छे स्टूडेंट हो। इसमें भी बेस्ट यानी आईआईटी।'
-देवब्रत पेन
मानव मन की इंजीनियरिंग समझने के लिए कैसे इंजीनियर बन गए संत: