नई दिल्ली. संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी पर अब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया का सही तरह पालन नहीं किया गया। एक टीवी चैनल से बातचीत में उमर ने कहा कि इस फांसी से कश्मीरी लोगों की यह धारणा और बढ़ेगी कि उन्हें इंसाफ नहीं मिलता। उमर से पहले मानवाधिकार संगठन और लेखिका अरुंधति राय भी इस फांसी का अलग-अलग कारणों से विरोध कर रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी अफजल की फांसी की निंदा की है।
सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस बात पर भी सवाल उठेंगे कि जिन लोगों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को मारने के लिए मौत की सजा सुनाई जा चुकी है, अफजल को उनसे पहले फांसी पर क्यों लटका दिया गया। उमर ने यह भी कहा कि अफजल गुरु के परिवार वालों को मौत से पहले उससे मिलने नहीं देना अमानवीय है।
दिसंबर 2001 में संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु को शनिवार को तिहाड़ जेल में फांसी देकर वहीं दफना दिया गया। अफजल की फांसी की सभी राजनीतिक दलों ने स्वागत किया लेकिन कश्मीर और दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में इसके विरोध में आवाजें भी उठीं। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कुछ युवाओं ने फांसी पर सवाल उठाए। अफजल को संसद पर हमले के 12 साल बाद फांसी दी गई। अफजल का केस शुरू होने से लेकर उसे फांसी होने तक काफी अड़चनें आईं। फैसले के समय सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने इस मामले को अदालत के बाहर भी रेयरेस्ट ऑफ रेयर बना दिया था। ऐसे में हम 5 कारण बता रहे हैं जो अफजल की फांसी पर सवाल उठाते हैं।