सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल के समय दी गई अपनी टिप्पणी में कहा था कि अगर अफजल के बयान को छोड़ दिया जाय तो यह साबित नहीं होता है कि वह किसी आतंकवादी संगठन का सदस्य है। और खुद उसका बयान भी उसे किसी आतंकी संगठन का सदस्य साबित नहीं करता है। सर्वोच्च अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि संसद पर हमले ने देश को झकझोर दिया है और समाज का 'सामूहिक विवेक' अपराधी को फांसी देने से ही संतुष्ट हो सकता है। अदालत ने इसके आगे कहा था कि आतंकियों और षड्यंत्रकारियों के इस कारनामे से देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को चुनौती मिली है। इस देशद्रोही षड्यंत्र में शामिल होने वाले के खिलाफ सबूत मिलने पर उसे अधिकतम सजा देकर ही इसका मुआवजा लिया जा सकता है। फांसी के विरोधी कह रहे हैं कि अदालत को सबूतों के आधार पर फैसला लेने के बजाय समाज के सामूहिक विवेक की तुष्टि के लिए फैसला दिया है।