मोदी के दबाव में फांसी?
अफजल को दी गई फांसी को राजनीतिक विश्लेषक राजनीति से प्रेरित कदम बता रहे हैं। यही नहीं विश्लेषकों का कहना है कि अजमल कसाब की फांसी भी यूपीए सरकार ने मौजूदा समय और राजनीति में खुद को बनाए रखने के लिए दी है। गुजरात में विधानसभा चुनावों से ठीक 20 दिन पहले कसाब को फांसी दिए जाने पर राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे गुजरात चुनावों के मद्देनजर उठाया गया यूपीए सरकार का कदम बताया था। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार भी एक हफ्ते से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय मुद्दा बने हुए थे। समाचार माध्यमों में उनका नाम भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर उछाला जा रहा था। 12 फरवरी को महाकुंभ में भाग लेने इलाहाबाद भी जाना था। इससे ठीक पहले अफजल गुरु को फांसी दिए जाने से राष्ट्रीय मीडिया से मोदी, कुंभ और भाजपा पीएम जैसे मुद्दे पूरी तरह से गायब हो गए।