अमानवीय है फांसी
फांसी को अमानवीय सजा बता कर अब तक दुनिया भर में 97 देश इस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। जबकि 58 देश फांसी दिए जाने के मामले में काफी सक्रिय हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी भारतीय संसद पर हमले के मामले में दोषी अफजल गुरु को फांसी दिए जाने की निंदा की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यक्रम निदेशक शशि कुमार वेलथ ने कहा कि वे फांसी दिए जाने की कड़े शब्दों में निंदा करते है। उन्होंने आरोप लगाया कि अफजल गुरु की सुनवाई की निष्पक्षता को लेकर भी गंभीर सवाल हैं। कुछ महीनों पहले ही भारत सहित 39 देशों ने मौत की सजा पर प्रतिबंध के संबंध में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए प्रस्ताव के मसौदे का विरोध किया था। भारत का तर्क था कि हर देश को अपनी कानून व्यवस्था तय करने का अधिकार है। प्रस्ताव के पक्ष में रिकार्ड 110 देशों ने मतदान किया। इस प्रस्ताव में फांसी पर रोक की बात कही गई थी। दो साल पहले 2010 में भी इस प्रस्ताव पर मतदान हुआ था, जिसमें 107 देशों ने मौत की सजा पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में मतदान किया था। मतदान के अगले ही दिन सुबह कसाब को फांसी दी गई थी। वैसे इस मतदान पर कई पुराने सहयोगी राष्ट्रों की अलग-अलग राय सामने आई। अमेरिका, जापान, चीन, पाकिस्तान, कोरिया, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया और भारत समेत 39 देशों ने इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया। 36 देशों ने कोई राय जाहिर नहीं की थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में जबरदस्त अभियान चलाने वाले राष्ट्र नॉर्वे ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया था कि इतना भारी समर्थन एक ‘महान परिणाम’ है।
मौत की सजा पर कुछ खास जानकारियां-
-73 देशों में इस सजा को लागू करने के लिए गोली मारी जाती है।
-इनमें से 45 देशों में फायरिंग स्कॉड मौत की सजा को लागू करने का एकमात्र तरीका है।
-भारत सहित 33 देशों में फांसी मृत्युदंड का एकमात्र तरीका है।
-छह देशों में स्टोनिंग यानी पत्थर मार कर यह दंड दिया जाता है जबकि पांच देशों में इंजेक्शन देकर यह सजा दी जाती है।
-तीन देशों में सिर कलम कर इस सजा को अंजाम दिया जाता है।
-चीन में इंजेक्शन और फायरिंग के जरिए मृत्युदंड की सजा दी जाती है।
-अफगानिस्तान और सूडान में फांसी के अलावा फायरिंग और पथराव के जरिए भी ऐसी सजा दी जाती है।