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'भारत को मिले सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता'

नेशनल ब्यूरो | Feb 16, 2013, 13:39PM IST
'भारत को मिले सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता'
नई दिल्ली. फ्रांस भारत के साथ सामरिक, रणनीतिक, व्यापार व शिक्षा के क्षेत्र में प्रगाढ़ साझेदारी के पक्ष में है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद ने दुनिया में भारत के बढ़ते प्रभाव को स्वीकार किया है। उन्होंने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पूर्णकालिक सदस्यता का हकदार बताया है। उन्होंने भारत से अपने रिश्तों का उपयोग करके ईरान का परमाणु कार्यक्रम रोकने में मदद करने को कहा है। ओलांद ने कहा है कि मैं जानता हूं कि भारत के ईरान के साथ कई वजहों से अच्छे रिश्ते हैं। उन्होंने कहा कि ‘भारत अपने मित्र देश ईरान को परमाणु कार्यक्रम समाप्त करने के लिए समझाए।’ 
 
भारत यात्रा पर आए ओलांद दिल्ली के नेहरू स्मृति संग्रहालय में आयोजित माधव राव सिंधिया स्मृति व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में शांति की एक बड़ी ताकत है। इसे अंतरराष्ट्रीय मसलों को सुलझाने में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने शांति और गुटनिरपेक्ष नीति की दुनिया में प्रासंगिकता के लिए गांधी और नेहरू के योगदान को याद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती माधवी राजे सिंधिया ने की। ऊर्जा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने फ्रांस के राष्ट्रपति की अगवानी की। कार्यक्रम में प्रोफेसर अमर्त्य सेन को फ्रांस के राष्ट्रपति ने सम्मानित किया। ओलांद ने कहा कि भारत 2014 के बाद अफगानिस्तान में संभावित स्थिति को लेकर चिंतित है, जब नाटो बल वहां से जाना शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को खुद अपने भविष्य के बारे में तय करना होगा। इस संदर्भ में उन्होंने पाकिस्तान से लक्ष्य पूरा करने में अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने को कहा। सीमापार से उकसाने वाले कार्रवाई की ओर संकेत करते हुए ओलांद ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका की सराहना की। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से सभी विवादों को टालने के लिए, भड़काऊ कार्रवाई का जवाब देने की नई दिल्ली की नीति की सराहना की। 
 
पूर्णकालिक सदस्यता की वकालत 
फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा, ‘आज हम चाहते हैं कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का पूर्णकालिक सदस्य बने। यहां दुनिया की 17 फीसदी आबादी निवास करती है। इसलिए विश्व की सुरक्षा को भारत की जरूरत है। फिर भारत एक शांति की ताकत है।’ माली में आतंकवाद के खिलाफ फ्रांस की लड़ाई में समर्थन के लिए भारत का आभार जताते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देश आतंकवाद का सफाया करने के लिए सहयोग जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, ‘भारत और फ्रांस ने अपनी सामरिक साझेदारी 1998 में शुरू की थी लेकिन मैं इसे अपवाद साझेदारी कहूंगा। आतंकवाद के खिलाफ हमारी सर्वाधिक संवेदनशील और महत्वपूर्ण लड़ाई है। और हमारे समक्ष चुनौतियां भी अधिक हैं।’ ओलांद ने भारत को यह भी आश्वस्त किया कि भारत और फ्रांस हिंद महासागर के इलाके में सुरक्षा को मजबूत करने में अपनी जिम्मेदारी का पालन करेंगे। 
 
शिक्षा क्षेत्र में भागीदारी की बात 
भारत में एक करोड़ 70 लाख छात्रों में से केवल तीन हजार के ही उच्च शिक्षा के लिए फ्रांस जाने पर अफसोस जाहिर करते हुए उन्होंने इस अंतराल को भरे जाने की वकालत की। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि अधिक संख्या में छात्र उनके देश में अध्ययन के लिए आएं। दोनों देशों की श्रेष्ठ प्रतिभाओं को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए। 
 
 
फ्रांस आर्थिक क्षेत्र में चाहता है मजबूत भागीदारी 
ओलांद ने कहा कि मेरी कामना है कि परमाणु व अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में फ्रांस की उत्कृष्टता को यहां उसकी सही जगह मिले क्योंकि आप भी ऐसा ही चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यूरो क्षेत्र का संकट पीछे छूट गया है लेकिन महाद्वीप आर्थिक संकट से बाहर नहीं निकला है। ओलांद ने कहा कि विकास का लाभ हर आम आदमी तक पहुंचाने के महात्मा गांधी व अन्य नेताओं के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत व फ्रांस को बिना रुके हुए काम करना चाहिए। उद्योगपतियों के साथ अपनी बैठक का जिक्र करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि कि भारतीय चाहते हैं कि उनकी वृद्धि दर आठ, नौ व दस प्रतिशत से अधिक हो और मैं भी इसका सपना देखता हूं। उन्होंने कहा, यहां डर है कि आर्थिक वृद्धि दर पांच फीसदी से नीचे जा सकती है, लेकिन इतनी वृद्धि भारत के लिए बेहतर प्रदर्शन होगा। उन्होंने कहा कि आपकी जरूरतें जनसंख्या वृद्धि के अनुरूप होनी चाहिए, उपभोक्ता बाजार और टिकाऊ सामान के क्षेत्र में मजबूत वृद्धि की आवश्यकता है। फ्रांस के राष्ट्रपति ने मजाकिया अंदाज में कहा, हम फ्रांस में यह कोशिश कर रहे हैं कि वृद्धि दर शून्य से कम न हो, हम सफल होंगे। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा, दोनों देश का एक सामान्य लक्ष्य अपनी वृद्धि दर बढ़ाना है इसलिए हमारे हित समान हैं। ओलांद ने कहा कि भारत व यूरोप के बीच वाणिज्यिक लेन-देन बीते कुछ साल में तीन गुना है लेकिन काफी कुछ और किया जाना है। 
 
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