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5 ऐसे बलात्‍कार, जब कांप गईं इंसानिय की रूह

www.dainikbhaskar.com | Dec 19, 2012, 10:26AM IST
5 ऐसे बलात्‍कार, जब कांप गईं इंसानिय की रूह
नई दिल्‍ली। राजधानी दिल्‍ली में हुए गैंग रेप के बाद अब कर्नाटक में पांच साल की एक बच्‍ची के साथ बलात्‍कार की घटना सामने आई है। कर्नाटक के बीदर जिले में बच्‍ची के परिवार से दोस्‍ताना संबंध रखने वाले एक शख्‍स ने ही इस वारदात का अंजाम दिया। घटना मंगलवार रात की है पुलिस ने आरोपी को अरेस्‍ट कर लिया है। बच्‍ची को बीदर के ही एक अस्‍पताल में भर्ती कराया गया  है। जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। (रेपिस्‍ट को दो फांसी से बड़ी सजा: हमारे कैंपेन से जुडि़ए)
 
दूसरी ओर,  दिल्‍ली गैंगरेप की घटना के बाद देश भर में उबाल है। नेता भी आवाज उठा रहे हैं, जनता भी सड़कों पर उतरी है। सरकार भी कुछ करते दिखने की कवायद कर रही है। लेकिन एसोचैम की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में हर 40 मिनट में एक महिला का अपहरण कर बलात्‍कार किया जाता है। शहर की सड़कों पर हर घंटे एक महिला शारीरिक शोषण की शिकार होती है। हर 25 मिनट में छेड़छाड़ की घटना होती है। (यूपी में पुलिसवाले ने किया रेप)
 

देश के अधिकांश प्रमुख महानगरों में विभिन्न सेक्टरों में काम करने वाली 92 प्रतिशत महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम करने के दौरान खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। एसोचैम के सामाजिक विकास संस्थान की ओर से जारी एक रिपोर्ट में यह बताया गया है। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा यह सर्वेक्षण दिल्ली, एनसीआर, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरू, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और देहरादून सहित कई शहरों में किया गया था। इस सर्वे में बीपीओ, अस्‍पताल, गारमेंट यूनिटों, विमान क्षेत्र में कार्य कर रहीं महिलाओं को शामिल किया गया।
 

दिल्‍ली और एनसीआर की महिलाओं का कहना है कि ट्रांसपोर्ट के साधन सबसे अधिक असुरक्षित हैं। पहले मेट्रो रेल सुरक्षित हुआ करती थी लेकिन अब यह भी असुरक्षित हो गई है। पुरूष यात्री महिलाओं के केबिन में घुस आते हैं। 
 
92 फीसदी महिलाओं का साफ मानना है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध को गैर जमानती अपराध घोषित करना चाहिए। सर्वे में यह बात भी सामने आई कि कमेंट करते, इशारा कर के और छू कर कर अपराधी महिलाओं को अपना शिकार बनाते हैं। 
 
सर्वे में 18-45 उम्र की पांच हजार महिलाओं को शामिल किया गया था। 1,200 महिलाएं दिल्‍ली और एनसीआर क्षेत्र की थीं। दिल्‍ली की 92 फीसदी महिलाओं ने माना कि वह रात में असुरक्षित महसूस करती हैं। जबकि, बेंगलुरू और कोलकाता की 85 फीसदी महिलाएं खुद को सुरक्षित नहीं मानती हैं। हैदराबाद में सिर्फ 18 प्रतिशत महिलाएं रात में खुद को असुरक्षित मानती हैं। 
 
62 फीसदी महिलाओं ने माना अच्‍छा पैकेज नाइट शिफ्ट में काम करने की सबसे बड़ी वजह है। इसी तरह काम का नेचर भी रात में कार्य करने की एक प्रमुख वजह है। 
 
एसोचैम के अनुसार, कैब्‍स और यातायात के अन्‍य साधनों में जीपीएस लगाकर अपराध को कम किया जा सकता है। इसके अलावा महिला कर्मचारियों को खुद की सुरक्षा का तरीका सीखा कर महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को रोका जा सकता है।

 
आगे की स्‍लाइड में जानिए, बलात्‍कार के कुछ दिल दहला देने वाले मामले और क्‍या कहता है भारतीय कानून



 
PHOTO : गैंग रेप के खिलाफ प्रदर्शन करते दिल्‍ली के कुछ  नागरिक। 
 
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