ठाकरे की मौत पर कमेंट करने वाली लड़कियों पर गृह मंत्रालय ने मांगी जानकारी
dainikbhaskar.com
| Nov 20, 2012, 07:30AM IST

इनकी गिरफ्तारी को शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने सही ठहराया। उन्होंने कहा कि वह हमला करने वालों लोगों की गिरफ्तारी का समर्थन करते हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ होता तो कानून व्यवस्था बिगड़ सकती थी। लेकिन पलघर (मुंबई) में शिवसेना के जिला अध्यक्ष ने कहा है कि शिवसैनिकों ने जो किया वह बाल ठाकरे के प्रति उनका प्यार दर्शाता है। इस बीच, कमेंट करने और उसे लाइकर करने वाली लड़कियों ने अपने-अपने फेसबुक एकाउंट डिलीट कर दिए हैं।
मंगलवार को पुलिस ने क्लिनिक पर तोड़फोड़ के आरोप में नौ लोगों को पकड़ा। हालांकि यह साफ नहीं है कि ये शिवसैनिक हैं या नहीं। मुंबई पुलिस ने शाहीन के पिता और चाचा को भी पूछताछ के लिए समन भेजा।
बाल ठाकरे खुद ताउम्र विवादित और भड़काऊ बयान देने के चलते विवादित रहे। 80 के दशक में उन्होंने कहा था, 'मुसलमान कैंसर की तरह फैल रहे हैं और उनका इलाज भी कैंसर की तरह ही होना चाहिए' (पढ़ें, खुद ठाकरे ने कैसे-कैसे बयान दिए थे)। ऐसे में एक फेसबुक कमेंट करने और उसे लाइक करने को लेकर की गई गिरफ्तारी का हर ओर विरोध हो रहा है।
पूरा मामला ये था
बाल ठाकरे की मौत के बाद 21 वर्षीय शाहीन धांदा ने महाराष्ट्र बंद पर फेसबुक पर कमेंट किया था। उसने लिखा था कि ठाकरे जैसे बहुत से लोग इस देश में पैदा होते हैं। उनका देहांत होता है। ऐसे लोगों के लिए बंद रखना कहां तक उचित है? टिप्पणी को उसकी सहेली रेणु ने लाइक किया था। इस टिप्पणी को एक अंग्रेजी दैनिक ने खबर बनाकर बनाकर प्रकाशित किया। इसके बाद शाहीन के पालघर स्थित चाचा के आर्थोपेडिक क्लीनिक पर 40 के करीब शिवसैनिकों ने हमला करके तोडफ़ोड़ की। इसके बाद एक स्थानीय शिवसैनिक की शिकायत पर मामला दर्ज कर शाहीन और रेणु को रविवार की रात गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने लड़कियों को पहले न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। लेकिन कुछ घंटे बाद ही 15-15 हजार रुपए के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया।
पुलिस ने इस कमेंट को ' लोगों की धार्मिक भावना भड़काने वाला' मानते हुए दोनों लड़कियों को अरेस्ट किया था। दोनों को आईपीसी की धारा 295 (ए) (धार्मिक भावनाएं भड़काना) और आईटी एक्ट, 2000 की धारा 64 (ए) के तहत पकड़ा गया था। (ठाकरे और उनके पूरे कुनबे के बारे में जानिए)
आप बताएं कि क्या दोनों लड़कियों ने फेसबुक पर कमेंट कर और उसे लाइक कर वाकई गुनाह किया था? क्या पुलिस ने लड़कियों को पकड़ कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत) के उनके मौलिक अधिकार का हनन नहीं किया है? क्या यह कमेंट किसी की 'धार्मिक भावना भड़काने वाला' था? अगर ऐसे कमेंट पर लोगों की गिरफ्तारी होने लगेगी तो हम-आप में से कितने लोग जेल से बाहर रह सकेंगे? क्या आपके मन में ये सवाल नहीं उठते हैं? और, इनके जवाब भी तो आपके पास होंगे? तो यहां अपने सवाल और जवाब लिख कर पूरी दुनिया को बताइए और खुल कर बोलिए कि इस मामले में दोषी कौन है और उसे सजा कौन देगा?
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