नई दिल्ली. सरकार ने अगस्ता वेस्टलैंड से 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की डील रद्द करने की प्रकिया शुरू कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने इसके साथ ही कंपनी को 'कारण बताओ' नोटिस जारी करते हुए 7 दिनों की मोहलत दी है। भारत ने इटली से फिर मांगी जानकारी है। रक्षा मंत्रालय ने घूस लेने वालों की जानकारी मांगी है। बताया जा रहा है कि संसद के बजट सत्र से ऐन पहले सरकार यह कदम उठाकर विपक्ष को हंगामा करने का कोई मुद्दा नहीं देना चाहती है। लेकिन बीजेपी सहित पूरा विपक्ष सरकार का पीछा नहीं छोड़ रहा है!
बीजेपी ने अब इस मामले में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी कनिष्क सिंह, हैश्के और एमार एमजीएफ की भूमिका की जांच की मांग की है। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने यह मांग करते हुए सीबीआई को चिट्ठी भी लिखी है। हेलीकॉप्टर घोटाले में बिचौलिया जी. राल्फ हैश्के का नाम आया है जो एमार एमजीएफ में डायरेक्टर था। कनिष्क के पिता और पूर्व विदेश सचिव एस के सिंह की एमार एमजीएफ में हिस्सेदारी थी। हैश्के ने कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला सामने आने के बाद एमार एमजीएफ का साथ छोड़ दिया था। कनिष्क अक्सर राहुल गांधी के साथ दिखाई देते हैं। कनिष्क के पिता एस के सिंह राजस्थान के राज्यपाल भी रह चुके हैं।
बवाल बढ़ता देख एमार एमजीएफ ने हैश्के से रिश्तों पर सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि अब उसका हैश्के से कोई रिश्ता नहीं है। हैश्को के अनुभव को देखते हुए कंपनी में जगह दी गई थी। हैश्के दो महीने तक ही डायरेक्टर रहे और उन्होंने बोर्ड की एक भी मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
वहीं, शिव सेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि बोफोर्स तोप घोटाले में गांधी परिवार के करीबी इटली के क्वात्रोच्चि का नाम दलाल के तौर पर आया था जो सोनिया गांधी का मुंहबोला भाई बताया जाता है। बोफोर्स कांड की जांच कर रही सीबीआई ने क्वात्रोच्चि को क्लीन चिट दे दी थी।
राज्यसभा के उपसभापति
पीजे कुरियन को लेकर पहले से घिरी कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार की मुश्किल कम होती नहीं दिख रही है। बीजेपी ने
हेलिकॉप्टर खरीद घोटाले में रिश्वतखोरी के मामले में कांग्रेस नीत यूपीए सरकार को निशाने पर लिया है। विपक्षी दलों ने यह भी कहा है कि उसे सीबीआई जांच पर भरोसा नहीं है और इसकी
न्यायिक जांच होनी चाहिए।
बीजेपी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने किसी का नाम लिए बिना सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, 'देश केवल यही जानना चाहता है, कि किसने खाया, कितना खाया। यानी सुषमा स्वराज की भाषा में कहें तो मोटा माल किसको मिला और कितना मिला?'