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'गे सेक्‍स' पर कन्‍फ्यूजन, सरकार ने दी सफाई

 
Source: dainikbhaskar.com   |   Last Updated 22:04(23/02/12)
 
 
 
 

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट में गे सेक्‍स के मामले में चल रही सुनवाई को लेकर आज खूब गहमागहमी रही। सरकार में एक टॉप लॉ आफिसर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में गे सेक्‍स को ‘अनैतिक’ करार देने के बाद गृह मंत्रालय ने कहा कि उसने दिल्‍ली हाई कोर्ट के उस फैसले पर कोई स्‍टैंड नहीं लिया है जिसके तहत समलैंगिकता को अपराध नहीं माने जाने का आदेश दिया गया है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि अटॉर्नी जनरल को सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की मदद के लिए कहा गया है।
 
समलैंगिकता पर जागरूकता फैलाने का काम करने वाली स्वैच्छिक संस्था लक्ष्य ट्रस्ट के गुजरात के को-ओर्डिनेटर सिल्वेस्टर मर्चेन्ट ने सरकार की दलीलों का खंडन करते हुए कहा है, 'जिन देशों में समलैंगिक संबंधों को मान्यता मिली है, वहां एचआईवी मरीजों की संख्या बहुत कम है, पर जहां इसे कानूनी मान्यता नहीं मिली है, वहां पर एड्स मरीजों की तादात ज्यादा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वहां इसको लेकर कोई जागरूकता नहीं है।' मर्चेन्ट ने जोर देते हुए कहा, 'जो लोग ये दलील देते हैं कि समलैंगिकता भारतीय संस्कृति के खिलाफ है, वे यह भूल जाते हैं कि कामसूत्र, खजुराहो मंदिर, किन्नरों की परंपरा, शिखंडी जैसे पात्र भी भारतीय संस्कृति के ही अंग हैं।'
 
इससे पहले गुरुवार को सरकार ने आईपीसी की धारा 377 को खत्‍म किए जाने का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि समलैंगिकता अनुचित है और देश की संस्‍कृति के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिकता से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय की ओर से यह दलील दिए जाने की बात सामने आई। यह खबर टीवी चैनलों के अलावा कई समाचार एजेंसियों ने भी जारी कर दी।
 
लेकिन गृह मंत्रालय ने साफ किया कि उसका इरादा हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने का नहीं है। जल्‍दीबाजी में जारी किए गए प्रेस बयान में गृह मंत्रालय ने कहा कि इस (गे सेक्‍स के) मामले पर कैबिनेट ने विचार किया था और फैसला किया गया कि केंद्र सरकार हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं करेगी।
 
बयान के मुताबिक, ‘हालांकि यदि इस केस से जुड़ा कोई पक्ष अपील करता है तो अटार्नी जनरल से इस मामले की जांच और इससे जुड़े कानूनी सवालों पर फैसला करने में सुप्रीम कोर्ट की मदद करने का अनुरोध किया जा सकता है।’
 
मंत्रालय ने कैबिनेट के फैसले से अटार्नी जनरल को अवगत करा दिया है। मंत्रालय ने कहा, ‘गृह मंत्रालय ने समलैंगिकता पर कोई रुख अख्तियार नहीं किया है, जैसा कि मीडिया (टीवी चैनलों) में दिखाया जा रहा है। मंत्रालय ने कैबिनेट के फैसले से अवगत कराने के अलावा और कोई निर्देश जारी नहीं किया है।’
  
 
क्‍या था मामला?
 
2009 में दिल्‍ली हाईकोर्ट की ओर से समलैंगिकता को अपराध नहीं माने जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। गृह मंत्रालय की ओर से कोर्ट में पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी पी मल्‍होत्रा ने कहा कि हमारे नैतिक और सामाजिक मूल्‍य अन्‍य देशों (पश्चिम) से अलग हैं और हम उन देशों का अनुसरण नहीं कर सकते हैं।
 
जस्टिस जी एस सिंघवी और जस्टिस एस जे मुखोपाध्‍याय की बेंच के सामने मल्‍होत्रा ने कहा, ‘गे सेक्‍स पूरी तरह अनैतिक है और सामाजिक व्‍यवस्‍था के खिलाफ है। गे सेक्‍स से बीमारियां फैलने की आशंका होती है।’
 
इस बीच, इस खबर को लेकर पर कई दिलचस्‍प टिप्‍पणियां भी आईं।
 
दिबांग- 'गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि समलैंगिकता से एड्स फैलता है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि एड्स के कितने मरीज समलैंगिक हैं? अदालत के इस सवाल का जवाब गृह मंत्रालय अब अगली बार देगा।'
सोनिया सिंह- ‘गृह मंत्रालय ने कोर्ट में कहा, प्रकृति ने मनुष्‍य के शरीर में कचरा निकालने के लिए एक नली बनाई है लेकिन इसका इस्‍तेमाल समलैंगिकता के लिए होने से एड्स के मामले बढ़ेंगे।’ सोनिया ने चुटकी लेते हुए कहा कि गृह मंत्रालय अब आतंकवादियों की तलाश करना बंद कर यह पता लगाएगी कि एड्स के शिकार कितने लोग समलैंगिक हैं।
आपकी राय
क्‍या आपकी नजर में समलैंगिकता अपराध है? क्‍या भारत में इस पर बैन लगा देना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्‍स में लिख कर सबमिट करें।
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