नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में 23 साल की स्टूडेंट से चलती बस में गैंग रेप और उसकी मौत से उपजा जनाक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। महिलाओं की सुरक्षा और रेप जैसे घिनौने अपराध के लिए कानून सख्त किए जाने की मांग भी तेज हो रही है। लेकिन पीछा करने और कपड़े उतारने जैसे दुष्कृत्यों पर केंद्र सरकार के रुख से विवाद और बढ़ने की आशंका है।
गृह मंत्रालय की नजर में किसी लड़की या महिला का पीछा करना और कपड़े उतारना यौन अपराध की श्रेणी में नहीं आते हैं। मंत्रालय का तर्क है कि इन्हें कोर्ट में परिभाषित करना और साबित करना कठिन होता है। इसलिए सरकार ने नए आपराधिक कानून संशोधन बिल-2012 में पीछा करने, कपड़े उतारने, नंगी परेड कराने और बाल मुंडवाने को यौन अपराध की अलग श्रेणी में नहीं रखने का फैसला किया है।
हालांकि हाल में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जिसमें पीछा करने वाले शख्स ने रेप किया और यहां तक कि अपने 'शिकार' का मर्डर भी कर दिया। प्रियदर्शिनी मट्टू का भी आरोपी संतोष सिंह ने लंबे समय तक पीछा किया था और उसका रेप करने के बाद हत्या कर दी थी।
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