अफजल गुरु की फांसी के फौरन बाद 9 और 10 फरवरी को पीओके के मुजफ्फराबाद में हुई यूनाइटेड जेहाद काउंसिल की बैठक में
दिलसुखनगर में धमाकों की साजिश रची गई थी। लश्कर सरगना हाफिज सईद और हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन के नेतृत्व में हुई इस बैठक को ‘एक्शन मीटिंग’ नाम दिया गया था। खुफिया ब्यूरो द्वारा जुटाई गई जानकारियों के मुताबिक बैठक में हूजी और जैश-ए-मुहम्मद के सरगना भी मौजूद थे। इसमें इंडियन मुजाहिदीन के भगोड़े आतंकियों रियाज भटकल और यासीन भटकल को रेकी कर नक्शे के साथ रिपोर्ट देने को कहा गया था।
हैदराबाद
ऑपरेशन की फंडिंग दुबई स्थित बशीर कैंप के जरिए हुई। खुफिया सूत्रों के मुताबिक धमाकों के लिए पहले 16, 19 और 20 फरवरी की तारीखें चुनी गई थीं। लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों को योजना का पता लग गया था और अलर्ट भी जारी हो गए थे। इसलिए योजना में तब्दीली करते हुए आतंकियों ने 21 फरवरी को घटना को अंजाम दिया।