20 अक्टूबर को भारत-चीन युद्ध के 50 साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर दैनिकभास्कर डॉट कॉम एक सीरीज चलाकर चीन द्वारा थोपे गये युद्ध की वजह से लेकर इससे जुड़े सभी सुने-अनसुने पहलुओं पर विशेष कवरेज दे रहा हैं। इस सीरीज में दोनों सेनाओं की स्थिति, रक्षा बजट, कूटनीति से लेकर अब तक की सभी स्थितियों पर हम विशेष जानकारी देंगे।
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इसी क्रम में हम आपको आज हथियारों की होड़ पर विशेष जानकारी दे रहे हैं। कड़वा यथार्थ यही है कि परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता हासिल करने की थोड़ी सी सुगबुगाहट ही प्रतिस्पर्द्धियों को जवाबी हमले करने प्रेरित कर देती है। उत्तरी कोरिया और इसके अंतरराष्ट्रीय संबंध यह साबित करने के लिए काफी हैं। इसी क्रम में परमाणु हथियार ने प्रतिस्पर्धा में और तेजी ला दी। अगर पहले नहीं तो कम से 1998 तक तो भारत ने चीन के खिलाफ परमाणु क्षमता हासिल कर ही ली थी। हालांकि यह भी नहीं कहा जा सकता कि ऐसा नहीं होता तो चीन भारत के खिलाफ हमले की योजना बना डालता। चीन और भारत दोनों यह अच्छी तरह जानते हैं कि अपने परमाणु हथियारों की तादाद बढ़ाने या उनकी रेंज में इजाफा करने के बावजूद यह यथार्थ नहीं बदलता कि इनका इस्तेमाल की नौबत न आने देना ही सबसे अच्छी स्थिति होगी।
एक अध्ययन ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयात देश बताया है। वर्ष 2007 से 2011 के बीच की अवधि के लिए किए गए इस अध्ययन के मुताबिक हथियारों के आयात में दक्षिण कोरिया दूसरे और पाकिस्तान व चीन तीसरे स्थान पर रहे।
चलिए आगे तस्वीरों के जरिए हम आपको बताते हैं कि चीन और भारत में किसमे कितना है दम?