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टाइमलाइन: संसद पर हमले से थर्रा उठा था देश

dainikbhaskar.com | Feb 09, 2013, 09:05AM IST
नई दिल्ली. 2001 में देश को हिला देने वाले संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को तिहाड़ जेल में शनिवार की सुबह फांसी (अफजल गुरु को तिहाड़ में दी गई फांसी) पर लटका दिया गया। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी को फांसी दिए जाने की सिफारिश राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी के पास 23 जनवरी को भेजी गई थी। राष्ट्रपति ने 26 जनवरी को फांसी के लिए मंजूरी दे दी थी। (आखिरी इच्‍छा के तौर पर कुरान मांगा था अफजल ने, पढ़िए- शुक्रवार शाम से फांसी दिए जाने तक की पूरी कहानी)
 
 
13 दिसंबर, 2001 को संसद पर हुए हमले से देश थर्रा उठा था। उस दिन संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही चल रही थी। हमले से ठीक पहले लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही 40 मिनटों के लिए रुकी हुई थी। बताया जाता है कि उस दौरान कई सांसद और तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री और रक्षा राज्य मंत्री हरिन पाठक संसद के भीतर ही थे। जबकि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और नेता, विपक्ष सोनिया गांधी संसद से बाहर जा चुकी थीं। लेकिन उसी बीच एक कार में बैठ कर पांच बंदूकधारी परिसर के भीतर घुस गए और कार ले जाकर तत्कालीन उपराष्ट्रपति कृष्णकांत की कार के नजदीक ले जाकर खड़ी कर दी। कृष्णकांत उस समय संसद के भीतर थे। आतंकियों की कार पर गृह मंत्री और संसद के स्टीकर लगे हुए थे। (TIMELINE: 15 दिन पहले तय हो गई थी कसाब की फांसी की तारीख)
 
 
कार से उतरकर बंदूकधारियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद उपराष्ट्रपति के सुरक्षाकर्मियों ने भी जवाबी फायरिंग शुरू कर दी और इसी बीच कंपाउंड के गेट बंद किए जाने लगे। कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी ने सबसे पहले आतंकियों को देखा था। पांच बंदूकधारियों में से एक ने सुसाइड जैकेट पहना हुआ था। उसे जब सुरक्षाकर्मियों की गोली लगी तो विस्फोट हो गया। उसके साथ हमले में शामिल अन्य 4 बंदूकधारी भी मारे गए। इस हमले में पांच पुलिसकर्मी, संसद का एक सुरक्षाकर्मी और एक माली शहीद हुए थे। इसके अलावा करीब 18 लोग जख्मी हुए थे। हमले में किसी सांसद या मंत्री को चोट नहीं लगी थी।  
 
 
टाइमलाइन
 

13 दिसंबर, 2001: पांच आतंकवादियों ने संसद भवन पर हमला किया। हमले में 9 लोग मारे गए। 
15 दिसंबर, 2001: दिल्ली पुलिस ने आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य अफजल गुरु को हिरासत में लिया। 
4 जून, 2002: अफजल गुरु, एसएआर गिलानी, शौकत हुसैन गुरु और अफसां गुरु के खिलाफ आरोप तय। 
18 दिसंबर, 2002: अफजल गुरु, गिलानी और शौकत को फांसी की सजा सुनाई गई। अफसां को फांसी नहीं हुई। 
4 अगस्त, 2005: सुप्रीम कोर्ट ने अफजल गुरु की फांसी के फैसले को बरकरार रखा। 
3 अक्टूबर, 2006: अफजल की पत्नी तबस्सुम ने तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के सामने दया याचिका दाखिल की, जिसे राष्ट्रपति ने गृह मंत्रालय को भेज दिया।  
10 अगस्त, 2011: गृह मंत्रालय ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के पास चिट्ठी भेजी, जिसमें फांसी की सिफारिश की गई थी। 
16 नवंबर, 2012: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अफजल की दया याचिका को वापस गृह मंत्रालय पुनर्विचार के लिए भेजा। 
10 दिसंबर, 2012: गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि वह अफजल की फाइल पर संसद के शीतकालीन सत्र के बाद विचार करेंगे। 
13 दिसंबर, 2012: अफजल की फांसी में देरी पर बीजेपी ने चर्चा के लिए लोकसभा में प्रश्नकाल स्थगित करने के लिए नोटिस दिया। 
11 जनवरी, 2013: गृह मंत्री ने कहा कि उन्हें अभी अफजल गुरु की याचिका पर फैसला लेना है।    
21 जनवरी, 2013: गृह मंत्रालय ने अफजल की फाइल राष्ट्रपति के पास भेजी। 
3 फरवरी, 2013 :  राष्ट्रपति ने अफजल गुरु की दया याचिका खारिज की। 
9 फरवरी, 2013 :  अफजल गुरु को सुबह 8 बजे फांसी दे दी गई।  
 

 
आगे की स्लाइड में तस्वीरों के जरिए देखिए कैसे हुआ था संसद पर हमला और कौन हुए थे देश के लिए कुर्बान: 
 
 
अफजल गुरु को तिहाड़ में दी गई फांसी
 
TIMELINE: 15 दिन पहले तय हो गई थी कसाब की फांसी की तारीख
 
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