मुजाहिदीन की नजरें फिर कश्मीर पर
एजेंसी
| Feb 24, 2013, 14:10PM IST

इस्लामाबाद. इंडियन एयरलाइंस के एक अपहृत विमान के यात्रियों की रिहाई के बदले छोड़े गए तीन आतंकियों में शामिल मुश्ताक अहमद जारगर ने अपने अल उमर मुजाहिदीन संगठन के लिए पाक अधिकृत कश्मीर से जम्मू कश्मीर में ‘सशस्त्र संघर्ष’ को पुनर्जीवित करने का फैसला किया है। मौलाना मसूद अजहर और अहमद उमर सईद शेख के साथ श्रीनगर निवासी जरगार उर्फ लाटराम की रिहाई के बाद उसके बारे में बहुत कम सूचना मिली इन तीनों को ‘उड़ान आईसी 814’ के यात्रियों की रिहाई के बदले छोड़ा गया था।
पाकिस्तानी आतंकी इस विमान का अपहरण कर उसे नेपाल में काठमांडू से अफगानिस्तान में कंधार ले गए थे। ‘द न्यूज डेली’ में प्रकाशित खबर के मुताबिक जरगार अल उमर मुजाहिदीन का प्रमुख है और अपनी रिहाई के बाद से वह पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में रह रहा था। संदिग्ध आतंकी अफजल गुरू को फांसी की सजा दिए जाने के बाद उसने अपने संगठन को फिर से सक्रिय करने का फैसला किया। गौरतलब है कि हालिया साक्षात्कारों में जरगार ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर मुद्दे का एक मात्र समाधान सशस्त्र संघर्ष है। उसने कहा था कि उसका लक्ष्य जम्मू कश्मीर को सशस्त्र संघर्ष के जरिए आजाद कराना है। उसने कहा, ‘धन, आदमी और हथियार हम कहीं से भी हासिल कर सकते हैं। हम अभी भी नियंत्रण रेखा के दोनों ओर प्रशिक्षण केंद्र चला रहे हैं।’
पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान ने देश में जरगार की मौजूदगी के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की थी पर ‘द न्यूज’ की खबर के मुताबिक वह 1999 में अपनी रिहाई के बाद से मुजफ्फराबाद में रह रहा था। वहीं, मसूद अजहर आज कल जैश ए मोहम्मद का प्रमुख है। उसने भी कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर में जिहाद तेज करना चाहता है। वाल स्ट्रीट जनरल के पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के सिलसिले में कराची की एक अदालत ने अहमद उमर सईद शेख को मौत की सजा सुनाई थी। जरगार आतंकी गतिविधियों में 1984 में शामिल हुआ था और वह भारत के तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपरहण के चलते सुखिर्यों में रहा था। उसके खिलाफ श्रीनगर में हत्या के तीन दर्जन मामले दर्ज हैं। अगस्त 1988 में उसने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट छोड़ दिया था और प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान चला गया था। जम्मू-कश्मीर लौटने पर उसने दिसंबर 1989 में अल उमर मुजाहिदीन का गठन किया। उसे 1993 में गिरफ्तार किया गया था और 1999 में उसकी रिहाई होने तक उसे जम्मू के कोट बलावल जेल में रखा गया था।









