नई दिल्ली. बाल ठाकरे की अस्थियां शुक्रवार को अरब सागर में विसर्जित कर दी गईं। उनके बेटे उद्धव ठाकरे ने पिता की अस्थियों को समंदर में प्रवाहित किया। इसके लिए मुंबई में गेट वे ऑफ इंडिया पर ठाकरे परिवार के तमाम सदस्य जुड़े थे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख और बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे भी इस मौके पर मौजूद थे।
हालांकि बाल ठाकरे के अस्थि विसर्जन के दौरान भी राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की दूरी साफ दिखी। राज ठाकरे अस्थि विसर्जन करने जा रही बोट पर आए और ठाकरे के अस्थि कलश को छुआ और बोट से उतर गए। समुद्र में विसर्जन करने कई बोट में वो नहीं गए। (
संसद पर हमले के दोषी अफजल को फांसी की हर खबर पढें)
बाल ठाकरे का निधन 18 नवंबर को हुआ था (
देखें अंतिम यात्रा की तस्वीरें)। इससे पहले अचानक उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी। इसे देखते हुए महाराष्ट्र पुलिस ने मुंबई हमले (
देखें तस्वीरें) के दोषी अजमल आमिर
कसाब को फांसी दिए जाने के लिए 'प्लान बी' भी तैयार कर रखा था। कसाब की फांसी के लिए 21 नवंबर की तारीख तय थी, लेकिन इससे कुछ दिन पहले ही ठाकरे की तबीयत बिगड़ने की खबर आ गई। तब तय किया गया था कि अगर 21 नवंबर को ही बाल ठाकरे का निधन हो जाए या उनका अंतिम संस्कार हो तो कसाब की फांसी की प्रक्रिया आर्थर रोड जेल में ही पूरी कर दी जाए। हालांकि इस स्थिति के लिए एक विकल्प फिर से ट्रायल कोर्ट के पास जाने का भी सोचा गया था। ट्रायल कोर्ट से फांसी की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया जाता।
कानूनन महाराष्ट्र की दो जेलों (पुणे और नागपुर) में ही फांसी दिए जाने का प्रावधान और सुविधा है। इसलिए आर्थर रोड जेल में अस्थायी इंतजाम कर कसाब को फांसी पर लटकाने की योजना को लेकर इसकी कानूनी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने का डर था। इसीलिए ट्रायल कोर्ट के पास जाने का विकल्प भी तैयार रखा गया था।
यह पूरा ऑपरेशन पूरी तरह गुप्त था। फांसी के बाद केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने देश को बताया कि 'ऑपरेशन एक्स' टॉप सीक्रेट मिशन था और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक को इसकी जानकारी टीवी से ही मिली। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी को भी इसकी जानकारी नहीं थी। हालांकि शिंदे के इस बयान को पूरी तरह सच नहीं माना जा रहा है। अब तालिबान ने भी कसाब की बॉडी मांगी है और नहीं देने पर
भारतीयों की जान लेने की धमकी दी है और इमरान खान ने तो
सरबजीत को फांसी देकर बदला लेने तक की मांग कर डाली है।
एक शख्स ने ट्वीट कर तंज कसा, 'जैसे मुंबई हमले के बारे में प्रधानमंत्री और सोनिया को जानकारी नहीं थी, उसी तरह कसाब की फांसी के बारे में भी नहीं रही होगी।' अदालती फैसले पर गोपनीय तरीके से तामील किए जाने को लेकर कई हलकों में
सवाल खड़े किए गए। लेकिन अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कसाब को फांसी दिए जाने का फैसला केवल देश से छिपाया गया। कांग्रेस और सरकार के बड़े लोगों को इसकी जानकारी पहले से थी।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण का बयान भी शिंदे के दावों की हवा निकालने वाला है। उनके मुताबिक कांग्रेस के कोर ग्रुप ने ही कसाब की फांसी की पूरी प्रक्रिया तय की थी। सरकारी एजेंसियों ने तो बस दिशानिर्देशों का पालन किया और पूरे ऑपरेशन को गुप्त रखा। शिंदे कांग्रेस कोर ग्रुप के सदस्य नहीं हैं।