काटजू ने लिखा था कि देश का एक बड़ा हिस्सा नरेंद्र मोदी को देश के अगले पीएम के तौर पर देखना चाहता है। उन्हें लगता है कि मोदी हताश और निराश देश में दूध और शहद की नदियां बहा देंगे। यह आवाज बीजेपी, आरएसएस के बीच से ही नहीं कुंभ मेले से भी आ रही हैं। इसमें देश के तथाकथित पढ़े-लिखे नौजवान भी शामिल हैं जो मोदी के इस प्रोपेगैंडा में शामिल हैं। काटजू आगे लिखते हैं कि आज गुजरात में मुस्लिम डर के साये में जी रहे हैं। उन्हें लगता है कि अगर वे 2002 के खिलाफ बोलेंगे तो उन्हें निशाना बनाया जाएगा। काटजू कहते हैं कि देश के सभी मुस्लिम आज मोदी के खिलाफ हैं हालांकि इसमें से कुछ ही लोग यह विरोध किसी ठोस कारण से करते हैं। मोदी के समर्थक दावा करते हैं कि गुजरात में जो हुआ वह गोधरा में एक ट्रेन में 59 हिंदुओं की हत्या की प्रतिक्रिया थी। गोधरा में क्या हुआ यह तो आज भी रहस्य है। गोधरा के हत्यारों को सख्त कानूनी सजा दी जानी चाहिए थी। पूरे मुस्लिम समुदाय पर हुए हमले को ठीक नहीं कहा जा सकता है जो राज्य में केवल 9 फीसदी हैं। 2002 में मुस्लिमों का जनसंहार किया गया, उनके घर जलाए, उन पर भयानक अत्याचार हुए।
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