लखनऊ. टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल यहां सोमवार को कई इमामों एवं बुद्धिजीवियों से मिलकर जन लोकपाल आंदोलन के लिए उनसे समर्थन मांगा।
केजरीवाल ने सोमवार को आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के उपाध्यक्ष और शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक के घर पहुंचकर मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने शहर के कुछ दूसरे मुसलमानों के साथ बैठक की।
इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सूत्रों के अनुसार मुस्लिम धर्मगुरुओं से केजरीवाल की मुलाकात का मकसद कांग्रेस के इस आरोप का जवाब देना है कि जन लोकपाल आंदोलन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का समर्थन प्राप्त है, मुस्लिमों का नहीं।
हालांकि इस दौरान उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर हिसार चुनाव पर भी सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि मोदी की तारीफ करना एक गलती थी।
सबसे पहले केजरीवाल ने शिकायतें सुनना आरम्भ किया और फिर एक-एक कर के सफाई देना शुरू किया। अन्ना के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ को उन्होंने गलत माना साथ ही यह भी कहा कि इस सम्बन्ध में अन्ना की सफाई को प्रमुखता से प्रकाशित नहीं किया गया।
उन्होंने कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह व आरएसएस के मोहन भागवत के संबंधों पर भी अन्ना द्वारा कही बातों को अखबारों में न आने की बात कही। केजरीवाल ने यह भी कहा कि जिस दिन आंदोलन सांप्रदायिक होगा, वह इससे दूर हो जाएंगे।
केजरीवाल ने बताया कि जब भी कोर कमेटी का विस्तार होगा, उसमें दलित व मुसलमान को भी शामिल किया जाएगा। बैठक में तय हुआ कि अब पोस्टर हिंदी के साथ उर्दू में भी छपेंगे।
केजरीवाल ने संवाददाताओं से कहा, "भ्रष्टाचार से वैसे तो हम सभी त्रस्त हैं, लेकिन सबसे अधिक गरीब और समाज के दबे-कुचले लोग परेशान हैं। चूंकि हमारे मुस्लिम भाइयों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, इसलिए भ्रष्टाचार से वे ज्यादा प्रभावित हैं।"
इंडिया अगेंस्ट करप्शन के पदाधिकारियों ने दावा किया कि मुस्लिम धर्मगुरुओं एवं बुद्धिजीवियों ने जन लोकपाल आंदोलन को पूरा समर्थन देने का वादा किया है।
उन्होंने कहा, "अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में सभी की राय यही थी कि जाति, धर्म और सम्प्रदाय से ऊपर उठाकर देश के लोगों को भ्रष्टाचार जैसी बुराई को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए आगे आना चाहिए।"
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