21 साल पहले जब जेआरडी टाटा ने रतन टाटा को टाटा संस का चेयरमैन नियुक्तकिया तो उनसे पूछा गया कि क्या आपने रतन को उनकी सत्यनिष्ठा की वजह से अपना उत्तराधिकारी चुना, तो जेआरडी ने कहा, ऐसा कहेंगे तो दूसरे उम्मीदवारों की सत्यनिष्ठा पर सवालिया निशान लग जाएगा। असल बात यह है कि वह बहुत हद तक मेरी तरह है। जेआरडी की यह बात रतन टाटा ने सही साबित की और टाटा ग्रुप को नई ऊंचाइयां दी। उनके उत्तराधिकारी साइरस मिस्त्री के लिए इसे कायम रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
चार बार हुआ प्यार
आमतौर पर कम बोलने वाले टाटा ने अपनी जिंदगी का एक खास सच दो साल पहले एक अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल को बताया। यह सच था प्यार और शादी से जुड़ा। बैचलर इंडस्ट्रियलिस्ट ने खुलासा किया कि किसी भी युवा की तरह उन्हें भी सीरियसली प्यार हुआ था, वह भी चार बार। टाटा के मुताबिक चारों बार बात विवाह तक भी पहुंची, लेकिन हर बार सोचने विचारने पर यही बात जेहन में आई कि अविवाहित रहना भी कोई बुरी बात नहीं है। इस तरह मैंने कई पेचीदगियों से खुद को बचा लिया।
अमेरिका छूटा तो प्रेयसी भी
टाटा के मुताबिक इनमें से एक अफेयर तो काफी सीरियस था। मैं अमेरिका में काम कर रहा था लेकिन मेरे भारत आने के फैसले के कारण रिश्ता शादी में तब्दील नहीं हो पाया। दरअसल उस वक्त भारत-चीन युद्ध शुरू हो गया था और अमेरिका में माना जा रहा था कि पूरा देश इस युद्ध की गिरफ्त में है। मेरी प्रेमिका भी इसी के चलते मेरे साथ भारत नहीं आई। बाद में उसने वहीं शादी कर ली।