तिहाड़ में कई आए, और कई गए। तिहाड़ ने सबको बदल दिया। कई बार देश की राजनीति भी बदल दी। सोलह साल पहले महानिरीक्षक रहते हुए किरण बेदी ने तिहाड़ की तस्वीर बदली थी। इस बार जब वे अन्ना से मिलने तिहाड़ गईं, तो वहां उन्होंने अन्ना के जादू का असर देखा। सारे कैदी अन्ना के अभियान पर टकटकी लगाए हुए थे। कई ने तो जेल में ही उपवास भी शुरू कर दिया था।
संसदीय चारा!
संसद आखिरी चारा है। संवैधानिक तौर पर भी और कभी-कभी ‘वैसे’ भी। दरअसल गुरुदास दासगुप्ता चाहते थे कि अन्ना को गिरफ्तार करने के विरोध में विपक्षी दल तीन दिन संसद का बहिष्कार करें। बाकी विपक्षी दलों ने उनकी सलाह ठुकरा ही दी, लेकिन सबसे मजेदार तर्क दिया लालू प्रसाद यादव ने। लालू ने दासगुप्ता से कहा कि तीन दिन के बहिष्कार से तीन दूनी छह हजार रुपए के भत्ते का घाटा होगा। अब बताइए? दासगुप्ता क्या कहते? बहिष्कार नहीं हुआ।
समझा करो
ट्विटर भी क्या बुरी शै है, जिसने भी कमेंट डाला, बहुत बुरा डाला। जी हां, ट्विटर शशि थरूर की नौकरी ले चुका है, लेकिन लत है कि जाती ही नहीं। भाई ने ट्विटर पर ‘आरक्षण’ फिल्म की तारीफ कर डाली। कहा, अच्छी फिल्म है और ‘बैन की तुक समझ में नहीं आई।’ तमाम कमेंट आए और किसी ने ये जवाब भी दे डाला कि ‘आपको मंत्री पद की बारीकियां ही कौन-सी समझ में आ गई थीं।’
चूक गए इतिहास से
आजादी के बाद यह दूसरा मौका है, जब किसी जज (सौमित्र सेन) पर महाभियोग लगा है। राज्यसभा में यह ऐतिहासिक कार्यवाही देखने के लिए सुषमा स्वराज और लालकृष्ण आडवाणी सहित लोकसभा के तमाम नेता गैलरी में पहुंच गए थे। लेकिन वहां से न सौमित्र सेन का चेहरा दिख रहा था और न आवाज सुनाई दे रही थी। उधर लोकसभा में चिदंबरम को अन्ना मामले पर जवाब देना था। लिहाजा सभी फौरन चले गए।
हम होते तो..
तय यह हुआ था कि महाभियोग की बहस के दौरान सारी पार्टियों के सिर्फ कानूनदां बोलेंगे। लेकिन उसमें भी राम जेठमलानी को मौका नहीं मिला। सौमित्र सेन ने दो घंटे तक जवाब पेश किया था। जेठमलानी का मानना था कि सौमित्र सेन झूठ बोलते रहे और अगर उनको मौका मिलता तो वे सिर्फ तीन सवालों में सौमित्र सेन की सारी दलीलों की धज्जियां उड़ा देते और यह हालत कर देते कि सौमित्र सेन घर जाने लायक न रह पाते। शायद इसीलिए..?
परहेज खत्म!
इतिहास बनते रहते हैं और आडवाणी को याद रहते हैं। अन्ना हजारे के मसले पर विपक्ष की बैठक में सीपीएम के सीताराम येचुरी का सुषमा स्वराज के कक्ष में पहुंचना एक इतिहास था। गदगद आडवाणी ने इसे तुरंत ताड़ लिया और याद दिलाया कि गृहमंत्री बनने के बाद वह भी अपने पहले सरकारी काम के तौर पर वरिष्ठ माकपा नेता ईएमएस नम्बूदरीपाद की अंत्येष्टि में भाग लेने केरल गए थे। बहरहाल, अब भाजपा के नेता भी सीपीएम के दफ्तर आया-जाया करेंगे।
घर की चीज
संसद ‘हाउस’ तो है ही, ‘होम’ भी नजर आने लगी है। मुरली देवड़ा मंत्रिमंडल से हटाए गए तो उनके सपूत मिलिंद देवड़ा ने शपथ ले ली। राजनीति में कई पद घरेलू विरासत की तरह हो गए हैं। अब ममता बनर्जी ने उद्योगपति स्वप्न साधन बोस के रिटायर होने से खाली हुई राज्यसभा सीट पर उनके बेटे सृंजय बोस को बैठाने का फैसला किया है।
लेटेस्ट महाभारत
अब जब संसद ‘घर’ है, तो स्वाभाविक तौर पर ‘महाभारतें’ भी रोज होंगी। कांग्रेस में अन्ना मामले से निपटने के कपिल सिब्बल और चिदंबरम के तरीके को लेकर ‘महाभारत’ छिड़ी हुई है, उधर कॉपरेरेट मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली अपनी ‘नई महाभारत’ लिखने में व्यस्त हैं। यह ‘महाभारत’ द्रौपदी के दृष्टिकोण से लिखी जा रही है, 12,000 छंद हो चुके हैं और अब युद्ध के बाद द्रौपदी-कृष्ण संवाद चल रहा है। मोइली इसमें इतने व्यस्त हैं कि वह संसदीय महाभारत में संजय बनने के लिए भी राजी नहीं हैं।
क्या संयोग है
एक मजेदार बात बताएं, जो उतनी मजेदार भी नहीं है। सलमान खुर्शीद जब कंपनी मामलों के मंत्री थे, तो उन्होंने दो बड़े घरानों की कंपनियों को किसी बड़े मामले में क्लीन चिट दी थी। इस मसले पर कानूनी राय मांगी गई है और अब सलमान खुर्शीद कानून मंत्री हैं। क्या बात है!
आरटीआई आउट, सीएजी इन
सीबीआई आरटीआई एक्ट से बाहर हो गई है, लेकिन पहली बार सीएजी ने खुफिया एजेंसियों को भी अपनी जांच के दायरे में ले लिया है। अभी तक उजागर घोटालों का सीएजी ने ही भंडाफोड़ किया है।
बूझो तो जानें
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी का हालचाल जानने के लिए न्यूयॉर्क के अस्पताल में जाने का मौका अभी तक सिर्फ एक बड़े औद्योगिक घराने के मालिक को मिला है, जो वहां अपनी पत्नी के साथ पहुंचे थे। यह घराना राजीव गांधी के समय से परिवार का मित्र है और महात्मा गांधी के परिवार से संबंधित है। आप पहचान गए न?
पापा कहते हैं
अन्ना का मोर्चा दिल्ली में लगा हुआ है और मजेदार बात यह है कि दिल्ली के एंटी करप्शन सेल में पिछले एक साल से भ्रष्टाचार का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। जाहिर है,ये अफसर बड़े होकर बड़ा नाम करेंगे। पापा कहते हैं।