नई दिल्ली. निेतिन गडकरी ने बीजेपी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने का कई नेता विरोध कर रहे थे। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी इसके खिलाफ थे। उन्हें संघ भी मना नहीं पाया था। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक पार्टी के गडकरी को दूसरा कार्यकाल दिए जाने के पक्ष में आडवाणी एकदम नहीं हैं। मंगलवार को आरएसएस के वरिष्ठ नेता सुरेश सोनी ने आडवाणी से उनके आवास पर मुलाकात की। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक संघ की ओर से लगातार कोशिश की जा रही थी कि आडवाणी गडकरी को लेकर मान जाएं, लेकिन आडवाणी ने फिर से साफ किया है कि गडकरी और उनसे जुड़ी रही कंपनी पर चल रही आयकर जांच कभी भी पार्टी पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में वे गडकरी को दूसरा कार्यकाल दिए जाने के हक में नहीं हैं।
वहीं, मुंबई में आयकर विभाग ने पूर्ति कंपनी में निवेश करने वाली कुछ कंपनियों के नौ ठिकानों पर छापे की कार्रवाई को अंजाम दिया। पूर्ति ग्रुप ने एक रिलीज जारी कर सफाई दी है कि आयकर विभाग की ताज़ा छापेमारी का उससे कोई लेना देना नहीं है। नितिन गडकरी का अब पूर्ति ग्रुप से कोई संबंध नहीं है। लेकिन पहले वे इस कंपनी से जुड़े रहे हैं। इसी मामले में बीजेपी गडकरी को एक फरवरी को आयकर विभाग के सामने पेश होना है। इससे पहले आयकर विभाग ने उन्हें नोटिस भेजा था। जिस पर पार्टी और खुद गडकरी ने कहा था कि उन्हें ऐसा कोई भी नोटिस नहीं मिला। अब खुद गडकरी चाहते हैं कि एक फरवरी के वक्त को थोड़ा और आगे बढ़ा दिया जाए। गडकरी के वकील सोमवार को आयकर विभाग के ऑफिस का भी चक्कर काट चुके हैं।
मैं नहीं चाहता हूं कि मेरे ऊपर जो आरोप लगे है उसके चलते पार्टी को कोई नुकसान पहुंचे। इसीलिए मैं इस्तीफा दे रहा हूं। बुधवार सुबह 9:30 बजे होने वाली बीजीपी संसदीय दल की बैठक में अलगे अध्यक्ष को लेकर फैसला होगा।