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नक्सलवाद, उग्रवाद और जातीय हिंसा देश के सामने नई चुनौती: पीएम

agency | Apr 16, 2012, 13:39PM IST
 
 


 
नई दिल्ली.प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि वामपंथी उग्रवाद, धार्मिक कट्टरवाद और जातीय हिंसा देश के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। प्रधानमंत्री ने राज्यों से आग्रह किया उन्हें केंद्र सरकार के साथ मिलकर इन चुनौतियों से लड़ना चाहिए। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान ये विचार व्यक्त किए। 
 
प्रधानमंत्री ने कहा, "वामपंथी उग्रवाद, धार्मिक कट्टरवाद और जातीय हिंसा देश के सामने आंतरिक सुरक्षा की बड़ी चुनौतियां हैं.. मैं राज्यों से आग्रह करता हूं कि केंद्र के साथ मिलकर इन चुनौतियों से लड़ें। फरवरी 2011 से देश में आंतरिक सुरक्षा के हालात कुल मिलाकर संतोषजनक रहे हैं।"
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ देश के रक्षा उपाय को बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश भर में बढ़ रही अस्थिरता के मद्देनजर यह आवश्यक है। मनमोहन सिंह ने कहा कि 2011 में वामपंथी उग्रवाद से सम्बंधित हालात 2010 से बेहतर थे, लेकिन इस दिशा में अभी बहुत कुछ करना बाकी है।
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत कार्य योजना के तहत नक्सल प्रभावित सात राज्यों में जिलों की संख्या 60 से बढ़ाकर 78 कर दी गई है।
 
नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर (एनसीटीसी) के गठन के विवादास्पद प्रस्ताव का जिक्र करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि वह इस मुद्दे पर पांच मई को मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा करेंगे। उनसे पहले केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने अपने सम्बोधन में वामपंथी उग्रवाद को देश के सामने सबसे दुर्जेय सुरक्षा चुनौती बताया।
 
ममता नदारद
 
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मुख्यमंत्रियों की बैठक में हिस्सा नहीं ले रही हैं। देश की आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर विचार के लिए यह बैठक बुलाई गई है। पश्चिम बंगाल की ओर से इसमें राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा हिस्सा ले रहे हैं। पूर्व में इस बैठक में ही नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर (एनसीटीसी) के मुद्दे पर चर्चा प्रस्तावित थी। 
 
ममता बनर्जी की मांग थी कि एन सीटीसी पर मुख्यमंत्रियों की अलग से बैठक बुलाई जाए। कुछ अन्य गैर कांग्रेसी राज्यों ने भी उनका समर्थन किया। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने एनसीटीसी पर विचार के लिए पांच मई को मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है। ममता ने इसमें न आने फैसला किया है। यही नहीं उनकी ओर से इसमें भाग न लेने की वजह भी नहीं बताई गई। इस बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम आंतरिक सुरक्षा पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश कर रहे हैं। 
 
इन मुद्दों पर हो रही है चर्चा
 
> पड़ोसी मुल्कों में बढ़ रही मुश्किलों के चलते भारत पर असर 
> सीमा पार आतंकवाद, 
> आतंकियों के लिए गुप्त समर्थन, 
> हथियारों की तस्करी, 
> जाली भारतीय नोटों की समस्या 
> शरणार्थी और आव्रजन के मुद्दे नक्सल मुद्दे पर अलग से चर्चा
 

 
 
 

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