माया की 'माया' चुनाव लड़े बिना सिद्दीकी बने 15 विभागों के मंत्री
Source: विजय मनोहर तिवारी | Last Updated 08:50(08/02/12)
बांदा। उत्तरप्रदेश में सबसे बदहाल सड़कें यहीं हैं। रफ्तार बमुश्किल बीस किलोमीटर प्रति घंटा। कई-कई किलोमीटर तक सड़क गायब। अब चौंकिए मत, लोकनिर्माण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी यहीं के हैं। मायावती के सबसे भरोसेमंद मंत्री, जिनकी लोकनिर्माण से ज्यादा चर्चा लोकायुक्त में हुईं शिकायतों की है।
लोकनिर्माण ही नहीं आबकारी, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत करीब 15 विभाग सिद्दीकी को मिले। ठेकेदारी करते-करते बसपा से जुड़े। चुनाव लड़े बिना मंत्री बने। विधान परिषद के रास्ते सदन में आए।
बांदा के लोग कहते हैं कि चूंकि वे कभी चुनाव में उतरे ही नहीं इसलिए कोई वादे भी नहीं किए। भला वे क्यों सड़कें बनाएंगे? 18.5 फीसदी मुस्लिम वोट वाले राज्य में सिद्दीकी बसपा के इकलौते मुस्लिम चेहरे हैं। भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों के बावजूद उनका बाल बांका नहीं हुआ।
जबकि एनआरएचएम घोटाले में बांदा के ही बाबूसिंह कुशवाहा को दफा होते देर नहीं लगी। इधर, नसीमुद्दीन से बांदा के ही मुसलमान सबसे ज्यादा खफा हैं। ढाई हजार बदहाल मुस्लिम बुनकर परिवारों में से एक रमजान खां पूछते हैं, 'बसपा बताए कि मुसलमानों के नाम पर नसीमुद्दीन के कुनबे के अलावा दलितों की पार्टी ने और किसका भला किया?'
आठ भाइयों के उनके भरे-पूरे कुनबे में एक भाई हसनुद्दीन रेलवे में टीटी थे। भाई के मंत्री बनते ही नौकरी छोड़ी। चार साल साथ रहे। अबसपा में हैं। प्राइमरी स्कूल से रिटायर्ड एक भाई जमीरुद्दीन करोड़ों की प्रेस के मालिक हैं।
बेटे वजाउद्दीन को कांग्रेस में दाखिल कराया है। साक्षी भाव से सब देख रहे बांदावालों का आकलन है कि सिद्दीकी पर भ्रष्टाचार के आरोप बेहद गंभीर हैं, जिनकी तमाम शिकायतें लोकायुक्त में हुई हैं। ऐसे में परिजनों को दूसरे दलों में फिट करके वे सरकार बदलने की सूरत में अपनी हिफाजत पक्की कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राहुल गांधी के निशाने पर मायावती के अलावा सबसे ज्यादा सिद्दीकी ही हैं। खासतौर से सूखा पीडि़तों के लिए मिले बुंदेलखंड पैकेज को लेकर। सिद्दीकी ने इस पैकेज से 26 ट्रेक्टर अपने कुनबे और करीबियों में बांटे।
मंत्री रहते बांदा के कॉलेज से एलएलबी करने वाले नसीमुद्दीन को लेकर ताजा विवाद उनकी सरकारी नौकरी का है। होमगार्ड में सहायक कंपनी कमांडर के पद पर वे 1982 में नियुक्त हुए थे। इस्तीफा दिए बगैर राजनीति में रम गए।
सामाजिक कार्यकर्ता अशोक निगम ने आरटीआई के तहत जिला कमांडेंट के दफ्तर से यह जानकारी सार्वजनिक कर बुंदेलखंड की 19 में से 15 सीटों पर काबिज बसपा की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अब सिद्दीकी अपने क्षेत्र की बजाए दूसरे इलाकों में व्यस्त हैं। बांदा के पास प्रसिद्ध तीर्थ चित्रकूट के पास तो सड़क जानलेवा हो गई।
कबरई गांव के लोगों ने कहा कि पिछली बार डामर-गिट्टी 17 साल पहले देखी थी। 24 वर्षीय रियाज बताता है कि मुझे याद नहीं यह सड़कें कभी ठीक हुई हों। अलबत्ता नसीमुद्दीन को लेकर होने वाली चर्चाओं में उनकी शाही जिंदगी, महंगी कारों, जमीनों, खदानों, आलीशान घरों जैसे फर्श से अर्श तक उठने के चमत्कारी किस्से हर वोटर की जुबान पर हैं।
ड्राइवर इम्तियाज अपनी बिरादरी के इतने ताकतवर मंत्री के बारे में पूछता है, 'मायावतीजी ने इनकी कौन सी काबिलियत पर इतना एतबार किया कि 15 बड़े महकमे सौंप दिए?'