फर्जी प्रचार के सहारे बेच रहे डिब्बे का दूध
चंडीगढ़. नवजात और बच्चों के लिए मिल्क पाउडर बनाने वाली कई नाम कंपनियों को अपने प्रोडक्ट का अप्रत्यक्ष और अवैज्ञानिक प्रचार करने पर सख्त कार्रवाई झेलनी पड़ रही है। सबसे ज्यादा गड़बड़ ब्रांडेड कंपनी नेस्ले के मिल्क पाउडर की पैकिंग में मिली है। इन कंपनियों अप्रत्यक्ष रूप से डिब्बे को दूध को मां के दूध से बेहतर बताकर अपना प्रोडक्ट बेचने का आरोप है। कंपनी की पैकिंग को आईएमएस(इनफेंट मिल्क सब्सटिट्यूट) एक्ट 1992 का उल्लंघन मानकर फूड एंड ड्रग एडमिन विभाग अम्बाला, करनाल, पानीपत, सोनीपत और रोहतक सहित कई शहरों में कंपनी के नैन परो सहित अन्य प्रोडक्ट्स के कुछ डिब्बे सुबूत के तौर पर जब्त कर चुका है। इनके अलावा एफडीसी, अमूल और वोकार्ड कंपनी के दूध पाउडर के कुछ डिब्बे भी जांच के लिए मार्केट से उठाए गए हैं। इन सभी प्रोडक्ट्स के कुल 25 सैंपल लिए गए और इनकी गुणवत्ता जांचने के लिए लैब से टेस्टिंग भी कराई जा रही है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग ने नामी ब्रांड नेस्ले पर आईएमएस एक्ट के तहत सीधे कोर्ट में केस दायर कर रहा है।
हरियाणा ने की पहल: फूड एंड ड्रग एडमिनि स्ट्रेशन विभाग के आयुक्त डा. राकेश गुप्ता के अनुसार हरियाणा देश में पहला राज्य है जिसने आईएमएस(इनफेंट मिल्क सब्सटिट्यूट) एक्ट 1992 के तहत सबसे पहले कार्रवाई की है। विभाग ने हेल्थ डिपार्टमेंट के साथ मिलकर पिछले महीने रोहतक की नई अनाज मंडी में नेस्ले के थोक विक्रेता के यहां छापा मार कर दूध पाउडर के कुछ डिब्बे जब्त किए थे। जांच के दौरान दूध की पैकिंग में आईएमएस एक्ट का उल्लंघन पाया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए दूध पाउडर की सैंपलिंग भी कराई गई है। इनके नतीजों में कमियां मिली तो फूड सेफ्टी एक्ट के तहत अलग से कार्रवाई की जाएगी।
नेस्ले के कई जगह से जब्त प्रोडक्ट्स में आईएमएस एक्ट का उल्लंघन मिला और इनके खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया जा रहा है।






