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26/11 के गुनहगारों को नहीं मिली सज़ा, फिर क्यों खेलें क्रिकेट?

agency | Jul 17, 2012, 11:12AM IST
 
 


नई दिल्ली.पाकिस्तान के साथ क्रिकेट रिश्ते बहाल करने के बीसीसीआई के फैसले पर कई राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस की महाराष्ट्र ईकाई ने क्रिकेट बोर्ड की खिंचाई करते हुए कहा है कि बीसीसीआई को लोगों की भावना का आदर करना चाहिए। 
 
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस ईकाई के अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे ने कहा, लोग क्या सोचते हैं और बीसीसीआई के क्या फैसला करती है, इसमें कोई फर्क नहीं होना चाहिए। 
 
वहीं, शिवसेना के नेता रामदास कदम ने बोर्ड के फैसले का विरोध करते हुए कहा, 'हमें उनके (पाकिस्तान) भारत आने पर तभी सोचना चाहिए जब वे आतंकवाद को लेकर अपनी नीति साफ कर दें।' 
 
सपा की महाराष्ट्र ईकाई ने भी ऐसी ही राय दी है। पार्टी के नेता अबु आजमी ने कहा, 'पाकिस्तान मुंबई में आतंकी हमले का दोषी है। हमारा उनके साथ खेल का रिश्ता कैसे हो सकता है?'
 
भारत और पाकिस्तान के बीच 5 साल बाद क्रिकेट रिश्ते बहाल हो गए हैं। सब कुछ उम्मीद के मुताबिक रहा तो इस साल दिसंबर में पाकिस्तान की क्रिकेट टीम 3 वनडे और 2 टी-20 मैच खेलने के लिए भारत आएगी। लेकिन सवाल उठता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले 5 सालों से क्रिकेट रिश्ता क्यों टूटा हुआ था? दोनों देश एक-दूसरे के यहां दौरा क्यों नहीं कर रहे थे? और अब ऐसा क्या बदल गया है कि भारत-पाकिस्तान की क्रिकेट के मैदान पर फिर से दोस्ती हो गई है?
क्यों टूटा था रिश्ता
भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी बार द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज 2007 में खेली गई थी। उसके बाद से अब तक दोनों देशों के बीच ऐसी कोई सीरीज़ नहीं खेली गई है, जिसमें सिर्फ यही दो देश शामिल हों। 26 नवंबर, 2008 को मुंबई पर हुए आतंकवादी हमलों के बाद पाकिस्तान के खिलाफ देश भर में एक माहौल बना था। इसके बाद 18 दिसंबर, 2008 को बीसीसीआई ने ऐलान किया कि टीम इंडिया 2009 की शुरुआत में पाकिस्तान के दौरे पर नहीं जाएगी। बीसीसीआई ने तब कहा था कि भारत सरकार की तरफ से उसे निर्देश मिला था कि मुंबई पर आतंकी हमले के बाद के माहौल को देखते हुए पाकिस्तान जाना सही नहीं है।
सीरीज़ नहीं, लेकिन मैच हुए
दोनों देशों के बीच बीते पांच साल में कोई सीरीज नहीं हुई लेकिन मैच तो खेले गए हैं। आखिरी वन-डे मैच इसी साल फरवरी में एशिया कप दौरान खेला गया था। बांग्लादेश के मीरपुर में हुए इस मैच में भारत जीता था।
पहले क्या भारत का रुख
भारत सरकार ने कहा था कि जब तक मुंबई के गुनहगारों को पाकिस्तान खुद सज़ा नहीं देता है तब तक दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते हैं। भारत ने शुरुआत में पाकिस्तान से राजनयिक बातचीत भी बंद कर दी थी।          
धूल झोंक रहा है पाकिस्तान!
मुंबई पर हमले को हुए 4 साल होने वाले हैं, लेकिन पाकिस्तान ने आज तक इस हमले में शामिल किसी भी शख्स को सज़ा नहीं दी है। न ही पाकिस्तान जांच में भारत का सहयोग कर रहा है। पाकिस्तान ने मुंबई के गुनहगारों की आवाज़ का नमूना तक नहीं दिया है ताकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां उसका भारत के पास मौजूद सुबूतों से तुलना कर सकें। उलटा पाकिस्तान ने एक जुडिशियल कमीशन भारत भेजकर सिर्फ दुनिया की आंखों में धूल झोंकनी की कोशिश की। यह कमिशन आतंकवादी हमले की जांच करने और सुबूत इकट्ठा करने आया था। लेकिन यह कहकर चला गया कि भारत ने कसाब और इस हमले के अन्य चश्मदीदों से पूछताछ की इजाजत नहीं दी। भारत ने इस पर सफाई दी कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते में ऐसी पूछताछ का कोई प्रावधान नहीं था। 
आखिरकार क्या बदला
भले ही भारत की मुंबई के जकीउर रहमान लखवी और हाफिज सईद जैसे गुनहगारों को सज़ा देने की मूल मांग आज भी नहीं पूरी हुई है, लेकिन अमेरिका जैसे देशों के अंतरराष्ट्रीय दबाव, कारोबारी जरुरतें, 'युद्ध से नहीं बातचीत से आतंकवाद' के स्थायी हल की गंभीरता को समझते हुए भारत आखिरकार पाकिस्तान के आगे झुक गया। सबसे पहले भारत ने पाकिस्तान से बातचीत का फैसला किया। इसे भारत की तरफ से बड़ा राजनयिक कदम माना गया। इसके बाद दोनों देशों ने क्रिकेट डिप्लोमेसी शुरू की। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ गिलानी (तस्वीर में) को भारत ने विश्व कप-2011 का सेमीफाइनल मैच देखने के लिए न्योता भेजा, जिसे उन्होंने मंजूर किया था।
 
पाठकों की प्रतिक्रिया
'कोई जरूरत नहीं है रिश्ते बहाल करने की। पाकिस्तान टीम को भारत में तब तक नहीं बुलाना चाहिए जब तक मुंबई हमलों के दोषियों के ऊपर पाकिस्तान कोई ठोस कदम नहीं उठाता है।' 
हरिश्चंद्र कुशवाहा, रियाद
'हम कबूतर उड़ाते रहें और वे गोलियां चलाते रहें? मुंबई हमले के बाद अगर क्रिकेट मैच बंद हुए, तो क्यों बंद हुए और अब शुरु हो रहे हैं तो क्यों? जब पाक आतंक खत्म करने में किसी तरह का सहयोग नहीं कर रहा है, तो फिर इसकी क्या जरूरत है?' 
यतिन तरनेकर, इंदौर
आपकी राय
जब मुंबई के असली गुनहगार आज भी आज़ाद हैं तो आखिरकार पाकिस्तान के आगे भारत क्यों झुक गया? क्या यह भारत की नीतियों की खामी है या नेताओं की? क्या भारत को पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना चाहिए? क्या इससे आतंकवाद खत्म हो जाएगा और रिश्ते बेहतर होंगे? या सिर्फ यह पैसा कमाने का उपाय भर है? 
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