झारखंड: राष्ट्रपति शासन के लिए अब सिर्फ राष्ट्रपति की 'हां' का इंतजार
प्रमोद कुमार सुमन/भास्कर न्यूज
| Jan 17, 2013, 15:03PM IST

नई दिल्ली/रांची. झारखंड में नवंबर, 2000 के बाद तीसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू होने के पूरे आसार बन गए हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की राज्यपाल की सिफारिश को मंजूरी दे दी। राज्यपाल की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर तैयार किए गए नोट को कैबिनेट के सामने विचार के लिए रखा गया था। कैबिनेट की सिफारिश को अब राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जहां मंजूरी मिलते ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाएगा।
झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अर्जुन मुंडा अब भाजपा के राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धमक दिखा सकते हैं। मुंडा बुधवार रात पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी से मंत्रणा करने के लिए दिल्ली पहुंचे। बताया जाता है राज्य में कार्यवाहक मुख्यमंत्री का दायित्व संभाल रहे मुंडा को अचानक दिल्ली इसलिए बुलाया गया है कि उनसे नई भूमिका पर चर्चा की जा सके। झारखंड की मौजूदा सियासी स्थिति को देखते हुए संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर भी उनसे चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में झारखंड के महत्व को देखते हुए मुंडा को राष्ट्रीय महामंत्री का दायित्व देने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
इस संबंध में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने 'भास्कर' को बताया कि झारखंड में पार्टी का जनाधार काफी अच्छा रहा है। यशवंत सिन्हा द्वारा पार्टी उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद फिलहाल राज्य से कोई भी नेता राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका में नहीं है। ऐसे में पार्टी अर्जुन मुंडा को फिर से राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपना चाहती है। जनवरी के अंत तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है। इसके बाद पार्टी के नए अध्यक्ष अपनी टीम गठित करेंगे, उसमें झारखंड से मुंडा
को यह महत्वपूर्ण पद देने पर मंत्रणा चल रही है। गौरतलब है कि मुंडा ने जब झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाली थी, उस समय वह भाजपा में राष्ट्रीय महामंत्री थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी ने उन्हें एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत को अपनाते हुए उन्हें महासचिव पद से मुक्त कर दिया था। प्रदेश भाजपा की कमान अर्जुन मुंडा के मुख्यमंत्री रहते हुए वरिष्ठ नेता रघुवर दास से लेकर दिनेशानंद गोस्वामी को दी गई थी, तब से वह अभी तक इस पद पर है। झारखंड में संगठन के चुनाव अभी तक नहीं हुए हैं।
भरोसे के काबिल नहीं रहा झामुमो: मुंडा
कार्यवाहक मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि भाजपा को झारखंड में राजनीतिक स्थिरता की चिंता है। ऐसे में सत्ता हस्तांतरण का झामुमो का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता। झामुमो भरोसे के काबिल नहीं रहा। उसके नेताओं ने भाजपा और यहां की जनता के विश्वास को तोड़ दिया। हम सिद्धांत और विचारधारा के साथ समझौता नहीं कर सकते। मुंडा ने ये बातें बुधवार को जमशेदपुर महानगर भाजपा द्वारा मिलानी हॉल में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन की समाप्ति के बाद पत्रकारों से कहीं। 'भाजपा के लिए सत्ता महत्व नहीं रखती' कार्यकर्ता सम्मेलन में अर्जुन मुंडा ने कहा कि भाजपा के लिए सत्ता महत्व नहीं रखती। उन्होंने झामुमो के सवालों का बिंदुवार जवाब दे दिया था। राज्य हित के साथ समझौता नहीं करने के कारण सरकार गिर गई। उन्होंने कहा, जिन लोगों ने 2006 में निर्दलीय की सरकार बनाई थी, वही फिर से सक्रिय हैं। फिर भ्रष्टाचार का राज नहीं हो, इसे ध्यान में रखते हुए मंत्रिपरिषद ने विधानसभा भंग करने की अनुशंसा की है। जो लोग राजभवन जाकर बहुमत होने का दावा कर रहे थे, अब मोहलत मांग रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस चीज का लोग इंतजार कर रहे हैं? राष्ट्रपति शासन, नई सरकार या विधानसभा भंग। तीन विकल्प पर राजनीतिक अनिश्चितता का वातावरण है। राष्ट्रपति शासन लोकतंत्र का विकल्प नहीं है। हम चुनाव को तैयार हैं।
आज राजभवन के सामने धरना
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिनेशानंद गोस्वामी ने कहा कि झारखंड विधानसभा को भंग करने की मांग को लेकर गुरुवार को राजभवन के सामने धरना दिया जाएगा।
आजसू की ओर देख रहा है आम आदमी : डॉ देवशरण
आजसू पार्टी ने संगठन की मजबूती के लिए अधिक से अधिक सदस्य बनाने का संकल्प व्यक्त किया। बुधवार को पार्टी कार्यालय दीनदयाल नगर में आयोजित बैठक में पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने कहा कि कार्यकर्ता ही संगठन की रीढ़ हैं। वर्तमान राजनीतिक हालात में राज्य की आम जनता आजसू पार्टी की ओर देख रही है। इसलिए यह जरूरी है कि पार्टी का सदस्यता अभियान जोर-शोर से चलाया जाए। बैठक में कहा गया कि 15 फरवरी तक 11 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
(तस्वीर: कार्यवाहक मुख्यमंत्री मुंडा का स्वागत करते कार्यकर्ता)







