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नीतीश की चली, मोदी को बिहार नहीं बुलाएगी भाजपा

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नई दिल्ली। सबसे मुश्किल गुजरात चुनाव जीतने की तैयारी कर रहे भाजपा के फायर ब्रांड मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की बिहार में 'नो इंट्री' जारी रहेगी। बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन जारी रखने के लिए नीतीश कुमार की इस शर्त को भाजपा नेतृत्व ने स्वीकार कर लिया है। इसके फौरन बाद सोमवार को पटना में नीतीश ने एलान किया कि अगला आम चुनाव दोनों पार्टियां मिलकर लड़ेंगी। यह सियासी मुहिम ऐसे समय परवान चढ़ी है जब इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों में नरेंद्र मोदी के प्रवेश को हरी झंडी दी जा रही है। 
 
पिछले कुछ वर्षों में यह तीसरा मौका है जब नरेंद्र मोदी को लेकर नीतीश की आपत्ति को भाजपा नेतृत्व ने माना है। बिहार विधानसभा के पिछले चुनाव के दौरान नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी को राज्य में प्रचार से रोकने की शर्त रखी जिसे भाजपा ने स्वीकार किया। दूसरा मौका मोदी के पीएम पद की दावेदारी को लेकर था। भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने स्वयं नीतीश कुमार को यह आश्वासन दिया कि पीएम प्रत्याशी एनडीए की सहमति से तय होगा। तीसरा मौका ऐसे समय आया है जब नरेंद्र मोदी को बिहार भाजपा के कार्यक्रम में बुलाने की तैयारी को लेकर विवाद हुआ। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सीपी ठाकुर ने दो-टूक कहा कि नवंबर में पार्टी के कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी शामिल होंगे। इसके तुरंत बाद जदयू की तरफ से गठबंधन तोडऩे के संकेत दिए गए और कहा गया कि जदयू ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने 40 प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। भाजपा ने भी पलटवार करते हुए 40 सीटों पर चुनाव लडऩे की बात की। 
 
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि दोनों दल यदि अलग होकर चुनाव लड़ेंगे तो दोनों को ही नुकसान होगा। एनडीए को मजबूत रखना सियासी जरूरत है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व ने नीतीश कुमार को यह आश्वासन दिया है कि बिहार में भाजपा के कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी हिस्सा नहीं लेंगे। भाजपा से आश्वासन मिलने के तुरंत बाद नीतीश कुमार ने एलान कर दिया है कि बिहार में भाजपा और जदयू लोकसभा का चुनाव मिलकर लड़ेंगे। 
 
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन का कहना है कि बिहार में भाजपा के कार्यक्रम में शामिल होने वाले नेताओं की सूची तैयार नहीं हुई है। कार्यक्रम के दिन कौन उपलब्ध है कौन नहीं यह पता करने के बाद ही कोई सूची तैयार होगी। जहां तक जेडीयू के साथ रिश्तों का सवाल है तो भाजपा-जेडीयू साथ थी है और रहेगी। मिलकर चुनाव लड़ेंगे।
 
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क्‍या जब अमेरिका, ब्रिटेन मोदी को लेकर नजरिया बदल रहे हैं तो नीतीश कुमार को भी नए सिरे से सोचने की जरूरत है?


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