गुवाहाटी मामले में पुलिस और पत्रकार महिला आयोग के निशाने पर

नई दिल्ली. गुवाहाटी में सरे राह बदसलूकी का शिकार हुई लड़की के नाम का खुलासा करना अल्का लांबा को भारी पड़ा है। लांबा को जांच टीम से हटा दिया गया है। लांबा ने अपने बचाव में कहा है कि पीडित लड़की की पहचान तो पहले ही जगजाहिर हो चुकी है तो ऐसा कर उन्होंने क्या गलत किया है? अल्का के इस रवैये की बीजेपी ने कड़ी आलोचना की है। बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने कहा है कि जांच टीम की सदस्य ने पीडित लड़की का नाम उजागर कर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन किया है। केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री कृष्णा तीरथ ने राष्ट्रीय महिला आयोग ममता शर्मा से पूरी मामले की जानकारी मांगी है।
गुवाहाटी में बीती सोमवार की रात नाबालिग लड़की से बुरी तरह छेड़छाड़ के मामले की हकीकत क्या है? इस सवाल का जवाब अभी तक उलझा हुआ है। महिला आयोग ने इस घटना के लिए 'न्यूज लाइव' चैनल के एक पत्रकार को प्रमुख रूप से जिम्मेदार माना है, जबकि पुलिस इस मामले में बार मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहरा रही है।
असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने स्थानीय न्यूज चैनल के पत्रकार की भूमिका को 'अनैतिक' करार दिया है। विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने आज कहा, 'यह अनैतिक पत्रकारिता का उदाहरण है। घटना की रिकार्डिंग करने में कोई बुराई है लेकिन पुलिस को सूचना देने की उस पत्रकार की सामाजिक जिम्मेदारी भी बनती थी। मीडिया सरकार और खासकर पुलिस को किसी ऐसी घटना के लिए जिम्मेदार ठहराता है लेकिन पत्रकारों की भी समाज के प्रति कोई जिम्मेदारी होती है। इस मामले में वे अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे हैं।' सीएम आज पीडित लड़की से मिलने उसके घर भी गए।
इस घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग करने वाले पत्रकार गौरव ज्योति नियोग से पुलिस पूछताछ करेगी। सीनियर पुलिस अधिकारियों ने गृह मंत्रालय को बताया है कि पत्रकार इस मामले के मुख्य आरोपी अमर ज्योति कलिटा का अच्छा दोस्त लगता है।
एक नेशनल न्यूज चैनल ने दावा किया है कि महिला आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस की भूमिका और न्यूज लाइव के चैनल के रिपोर्टर पर सवाल खड़ा किया है। दो सदस्यीय दल इस मामले की जांच कर दिल्ली लौट आया है। दल में अल्का लाम्बा के अलावा महिला आयोग की सदस्य वानसुक सिएम हैं।









