नई दिल्ली। 16 दिसंबर की रात दिल्ली में चलती बस में गैंगरेप की शिकार हुई लड़की शादी से कुछ ही दिन पहले
दुनिया को अलविदा कह गई। लेकिन वह एक अलख जगा गई है। उसे इंसाफ दिलाने के लिए देश भर में लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं
(देखें तस्वीरें)। वे मांग कर रहे हैं कि बलात्कारियों के लिए सख्त सजा तय हो, ताकि
ऐसी घटनाएं रुक सकें। हालांकि उनका आक्रोश दिशाहीन और नेतृत्वविहीन है, लेकिन क्या कानून बनाने भर से बलात्कार रुक जाएंगे? कानून से सोच बदल सकती है? परिजनों और परिचितों के हाथों इज्जत लूटे जाने की घटनाएं कैसे रुकेंगी? सख्त कानून बन जाने भर से हम महिलाओं का इज्जत करना सीख जाएंगे? नहीं। तो बलात्कार रोकने के लिए फिर क्या किया जाना चाहिए? आगे पांच उपायों पर एक नजर:
आज भी बेटी पैदा होने की खबर मुरझाई आवाज में ही दी जाती है। बेटी होने का दुख आवाज में ही झलक जाता है। कई बार यह देखने को मिलता है कि घर से लेकर सड़क तक पर बेटों को राजकुमार की तरह रखा जाता है। यदि घर में दूध आएगा तो बेटे को मिलेगा, बेटी सिर्फ ताकती रहेगी। घर का काम बेटी करेगी। बेटा राजकुमारों की तरह ऐश करेगा। यदि हम बेटों को 'राजकुमार' बनाने की मानसिकता को तोड़ दें तो आधी समस्या का हल खुद ब खुद हो जाएगा। इस तरह हम परिवार में ही शुरू से लड़कों में लड़कियों की इज्जत करने की सीख डाल पाएंगे।
(पढ़ें: क्या पूरी होगी दामिनी की अंतिम इच्छा?)