नई दिल्ली। दिल्ली में चलती बस में गैंगरेप मामले में पांच आरोपियों की साकेत कोर्ट में पेशी के दौरान जबरदस्त हंगामा हुआ। दो वकील आरोपियों का मुकदमा लड़ने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद ही कई वकील भड़क गए और उन्होंने हंगामा मचा दिया।
इस बीच देश में लगातार बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं और इसी बीच इस पर बहस भी चल रही है। टाइम डॉट कॉम भी इस पर बहस चला रहा है। जद(यू) अध्यक्ष शरद यादव ने कहा है कि अभी जो बलात्कार पर देश भर में बहस चल रही है, वह सतही है। उधर, गैंग रेप की शिकार बनने के बाद जिंदगी को अलविदा कह चुकी दामिनी (जानिए छात्रा की आपबीती) को न्याय दिलाने के लिए जहां आज भी कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग जंतर-मंतर पर उसके लिए लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर, इस छात्रा के नाम को दुनिया के सामने लाया जाए या नहीं, इस पर तेज बहस चल रही है (जानिए : 'दामिनी' को इंसाफ दिलाने के 5 उपाय)। ब्रिटिश अखबार ने पिता के हवाले से छापा कि वह चाहते हैं कि उनकी बेटी का नाम दुनिया के सामने आए (हालांकि छात्रा के पिता ने बाद में स्पष्ट किया कि वह केवल कानून बनाने के लिए बेटी के नाम का इस्तेमाल चाहते हैं, वरना नाम जगजाहिर करना नहीं चाहते)। इसके बाद भारत में भी कुछ मीडिया के एक तबके में नाम छापने की होड़ दिखी और सोशल साइट्स पर तो इस पर खूब बहस हुई। इस बहस की शुरुआत सरकार में मंत्री पद पर काबिज शशि थरूर के ट्वीट से हुई, जो चाहते हैं कि छात्रा के नाम से देश में कानून बने। भाजपा इस छात्रा को मरणोपरांत अशोक चक्र देने की वकालत कर रही है (दिल्ली गैंग रेप: आपस में भी नहीं करते बात, खुदकुशी कर सकते हैं 5 आरोपी!)। लेकिन असल सवाल नाम का नहीं है। सवाल है बदलाव का। पुलिस की कार्यप्रणाली, अस्पताल के बुनियादी ढांचों, समाज के सोच, नेताओं के नजरिये में बदलाव का।
मप्र के मंत्री, महिला वैज्ञानिक से लेकर आसाराम बापू तक इस मामले में जो बयान दे रहे हैं, वे इस बदलाव की और ज्यादा जरूरत दर्शाते हैं।
आगे की स्लाइड में जानिए, पुलिस, समाज, अस्पताल और कानून की वर्तमान स्थिति और बदलाव के कुछ महत्वपूर्ण सुझाव।
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