समाज : नैतिकता की बातें सिर्फ कहने में
हम भले ही दामिनी के लिए सड़क पर संघर्ष करें लेकिन सबसे पहले बदलाव हमें खुद से करना होगा। उस रात दामिनी और उसका दोस्त सड़क किनारे सैकड़ों लोगों से मदद मांगता रहा, लेकिन कोई आगे नहीं आया। दामिनी के दोस्त का कहना है कि हमारे पास कपड़े नहीं थे। शरीर से खून बह रहा था। हम इंतजार करते रहे कि कोई तो मदद करेगा। कई गाड़ियां पास से गुजरीं, मैंने हाथ हिलाकर रुकने को कहा.. ऑटो, कार वाले स्पीड स्लो करते लेकिन रुका कोई नहीं। मैं चिल्लाता रहा कि कोई कपड़े तो दे दो। लेकिन किसी ने कपड़े नहीं दिए। 20-25 मिनट तक हम मदद के लिए लोगों को पुकारते रहे। 15-20 लोग वहां खड़े थे। कोई कह रहा था कि लूट का मामला होगा। डेढ़-दो घंटे हम वहीं पड़े रहे। यदि आप और हम चाहते हैं कि अब देश में दूसरी दामिनी न हो तो शुरूआत हमें खुद से करनी होगी।
यहां जानिए कुछ ऐसे ही उपाय के बारे में।
भारतीय समाज में महिलाओं को देवी की तरह पूजा जाता है लेकिन घर से लेकर सड़क तक पर उन्हें ही निशाना बनाया जाता है। कहीं बाप तो कहीं शिक्षक महिलाओं के साथ खेल रहे हैं। हमारे समाज की पोल खोलते जरा इन आंकड़ों पर एक नजर डालें। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार पिछले पांच सालों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में इजाफा हुआ है। 2007 में महिला उत्पीडऩ के लगभग 8.8 प्रतिशत मामले सामने आते थे। 2011 में यह दर बढ़कर दस फीसदी तक पहुंच गई है। पूरे देश में बलात्कार, महिलाओं पर हमले और प्रताडऩाओं के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। इन अपराधों में 2010 के मुकाबले 2011 में औसतन 7.1 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
यदि हमें समाज में अपराध रोकना है तो शुरूआत घर और स्कूलों से करनी होगी। बच्चों को नैतिक शिक्षा के साथ सेक्स एजुकेशन देना अनिवार्य करना होगा। इसके अलावा महिलाओं को देवी मानने की परंपरा को बंद कर उसे इंसान मानते हुए समानता का अधिकार देना होगा।