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'सख्‍त' कानून बनने के बाद भी बीवी से बलात्‍कार की रहेगी 'छूट'!

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नई दिल्‍ली। दिल्‍ली गैंगरेप के बाद बलात्‍कारियों को फांसी की मांग पर देश भर में उबाल आया हुआ है। सरकार की ओर से भी कहा जा रहा है कि बलात्‍कार की घटनाओं को लेकर हर संभव सख्‍ती होगी। लेकिन दिल्‍ली में हुई वारदात से ठीक बारह दिन पहले यौन शोषण के खिलाफ संसद में जो बिल पेश किया गया है, उसमें बलात्‍कार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' का वादा पूरा करने की झलक नहीं दिखाई देती है। बिल में पत्‍नी से जबरन सेक्‍स को रेप नहीं माना गया है। आईपीसी की धारा 375 और 376 बिल के प्रावधानों के मुताबिक केवल 15 साल की उम्र होने पर ही पत्‍नी से उसकी मर्जी के बिना सेक्‍स बलात्‍कार की श्रेणी में आएगा। (120 तस्‍वीरों में देखिए इंडिया गेट के आंदोलन को)
 
आईपीसी की धारा 375 और 376 में शादी के बाद सेक्‍स का जिक्र है। इसमें कहा गया है कि अगर पत्‍नी 15 साल से कम उम्र की है तो उसके साथ बिना उसकी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाना रेप माना जाएगा। सरकार ने ताजा बिल का जो मसौदा पेश किया है, उसमें इस उम्र सीमा को एक साल बढ़ा भर दिया गया है। मूल रूप से पत्‍नी की मर्जी के बिना सेक्‍स के प्रति उसे सुरक्षा देने का कोई इंतजाम इस बिल में नहीं है। हां, इतना प्रावधान जरूर किया गया है कि अगर 16 साल तक की उम्र में पत्‍नी से कोई बिना उसकी मर्जी से सेक्‍स करता है तो उसे अधिकतम उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। सजा की अधिकतम सीमा फिलहाल दो साल की जेल ही है। प्रस्‍तावित कानून लागू होने पर एक बदलाव यह भी होगा कि कानूनी तौर पर अलग रहते हुए अगर कोई शख्‍स अपनी पत्‍नी से रेप करता है तो उसे अब दो साल के बजाय सात साल तक जेल में बिताना पड़ सकता है।
 
इस बिल में यौन शोषण के दोषियों के लिए सजा दो साल से बढ़ाकर पांच साल करने और यौन उत्‍पीड़न या छेड़छाड़ पर सजा को एक साल से बढ़ाकर तीन साल करने का भी प्रावधान किया गया है। लेकिन शादी के बाद रेप (पत्‍नी से) के मामले में इक्‍कीसवीं सदी की सोच इस बिल में कहीं नहीं झलकती है। यह तब हो रहा है कि जब दुनिया के सौ से अधिक देशों ने बीवी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने को अपराध माना है। 
 
दिसंबर की शुरुआत में दिल्ली की एक अदालत ने भी साफ कर दिया था कि पत्‍नी के साथ जबरदस्‍ती सेक्‍स करना रेप नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि आईपीसी में वैवाहिक बलात्कार जैसा कोई मामला नहीं होता है। यदि शादी कानूनन सही है तो पत्‍नी से सेक्स (भले ही जबरन किया गया हो)  रेप जैसा मामला नहीं है। पत्नी से रेप के आरोप में एक आरोपी को अदालत ने यह दलील देते हुए बरी कर दिया। 
 

 


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