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रक्षा मंत्रालय की आंतरिक जांच में नहीं मिली गड़बड़ी
विनीता पांडेय
| Feb 22, 2013, 12:26PM IST

नई दिल्ली. रक्षा मंत्रालय ने अपनी एक ‘अनौपचारिक आंतरिक जांच’ में अगस्तावेस्टलैंड कंपनी से वीवीआईपी हेलिकाप्टरों की खरीद की प्रक्रिया को जायज पाया है। इस जांच के अनुसार सौदे की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर चूक नहीं हुई है। वैसे सीबीआई की टीम इटली में कथित दलाली के ठोस सबूतों की तलाश में लगी हुई है। इटली में भी जांच चल रही है।
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को यह भी लगता है कि फिनमेक्कानिका कंपनी को शायद बिचौलियों ने झांसे में रखा। वजह यह है कि वीआईपी हेलिकॉप्टरों की तकनीकी शर्तों को कम करने का काम 2005 में ही हो चुका था। इस तरह वह 2006 में बने प्रस्ताव में पहले से ही शामिल था। सौदे पर अंतिम दस्तखत 8 फरवरी 2010 को हुआ, लेकिन कथित रूप से दलाली 2007 से 2011 के बीच दी गई है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने भास्कर को बताया कि कथित दलाली से सन्न रह गए। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने एक आंतरिक जांच करवाई। उन्होंने सभी फाइलों, कागजात और संवाद प्रक्रिया की समीक्षा हुई। आम तौर पर सतर्क रहने वाले एंटनी यह आश्वस्त होना चाहते थे कि पूरी प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। इसीलिए उन्होंने हर फाइल और कागजात की दो-दो बार जांच पड़ताल की ताकि कोई सुराग मिल सके। इस अधिकारी ने कहा, ‘इस जांच में यह पाया गया कि करार दस्तखत करने के पहले हर प्रक्रिया और रक्षा खरीद नियमों का पूरी तरह पालन किया गया। कहीं कोई चूक नहीं हुई।
रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी यह जानकार हैरान हो गए कि इस सौदे में कोई बाहरी व्यक्ति शामिल था।’ सरकार को यह भी राहत हुई कि कथित दलाली के लेनदेन के आरोपों में रक्षा मंत्रालय के किसी व्यक्ति पर संदेह नहीं उभरा है। मंत्रालय की यह आंतरिक जांच रक्षा मंत्री को संसद में सवालों के जवाब देने में शायद मददगार हो। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम रक्षा मंत्रालय पर आम तौर पर सौदे के बारे में चर्चा नहीं करते और प्रेस तक बहुत ही कम सूचनाएं जाती हैं। ऐसा लगता है कि कोई इन सीमित सूचनाओं से ही कथित आरोपियों को सौदे को प्रभावित करने का सुराग मिल गया होगा।’ मंत्री महोदय काफी परेशान रहे हैं और वे हमेशा कहते रहे हैं कि किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। खुद एंटनी ने भी कहा है, ‘तमाम तरह की सावधानियां बरतने के बाद भी ऐसा कुछ बाहर आ गया।
एंटनी ने कहा हमने अधिकतम सावधानी बरती और छह बड़ी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया। मुझे विदेश से एक ईमेल मिला कि कोई अभिषेक वर्मा रक्षा सौदे में गड़बड़ी करने की कोशिश कर रहा है तो हमने वह फौरन वह ईमेल सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को भेज दिया। आज वह शख्स जेल में है। लेकिन हेलिकॉप्टर सौदे के खुलासे से हम दंग रह गए। और हम अपनी व्यवस्था को और कड़ी कर रहे हैं।’






