नई दिल्ली. क्या केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने वित्त वर्ष 2013-14 का बजट पेश करते हुए गलत आंकड़े दिए हैं? चिदंबरम (
BUDGET: अमीरों से 12.43 लाख लेकर हमें दिए सिर्फ 2 हजार रुपये) के सुपर रिच यानी धनाढ्य के तौर पर पहचाने गए 42800 लोगों के आंकड़े से यह सवाल उठ खड़ा हुआ है। चिदंबरम के बजट ब्योरे के मुताबिक इस देश में सालाना एक करोड़ से ज्यादा की आमदनी वाले सिर्फ 42800 लोग ही हैं। जबकि हकीकत कुछ और है।
मशहूर ऑडिट कंपनी केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 5.5 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश करने वाले 1.25 लाख लोग हैं। जाहिर है इनके पास अन्य चल और अचल संपत्तियां भी होंगी, जिनमें घर, गाड़ी वगैरह शामिल होगा। साफ है कि ऐसे लोगों की
सालाना आमदनी एक करोड़ से कम नहीं हो सकती है। वहीं, एक अन्य आंकड़ा भी चिदंबरम के दावे में खामी की तरफ इशारा करता है। देश में लग्जरी कारों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। हर साल करीब 27 हजार महंगी कारें बिक रही हैं। ऐसे में चिदंबरम की नजरों में देश में सिर्फ 42800 लोगों के सुपर रिच होने के दावे में खामी नजर आती है। दक्षिणपंथी आर्थिक विशेषज्ञ एस. गुरुमूर्ति का कहना है कि चिदंबरम का बजट भ्रम पैदा करता है और उनके कई दावे गलत हैं।
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