दुनिया की सबसे ऊंची युद्धभूमि पर कुछ यूं रहते हैं हमारे 'जवान'

नई दिल्ली. सियाचिन ग्लेशियर हिमालय के काराकोरम रेंज के पूर्वी भाग मे स्थित है। सियाचिन समुद्र तल से करीब 5,753 मीटर (20 हजार फीट) ऊंचाई पर है। सामरिक रूप से यह भारत और पाकिस्तान के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है।
यहां से लेह, लद्दाख और चीन के कुछ हिस्सों पर नजर रखने में भारत को मदद मिलती है। इस पर सेनाएं तैनात रखना दोनों ही देशों के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि सियाचिन में भारत के करीब 10 हजार सैनिक तैनात हैं और इनके रख-रखाव पर सालाना करोड़ों रुपए खर्च होते हैं।
-70 डिग्री के सुपरमैन
सियाचिन ग्लेशियर का तापमान -70 डिग्री से भी कम होता है। इतने कम तापमान में सरहद की हिफाजत के लिए देश के जाबांज तैयार रहते हैं। 20 हजार फीट उंचे इस मैदान-ए-जंग में पिछले 27 साल में 2000 से ज्यादा जवान मारे गए हैं। यहां सैनिकों की तैनाती सिर्फ तीन महिने के लिए की जाती है। ग्लैशियर में 150 भारतीय पोस्ट हैं। इस पर रोजाना 15 करोड़ का खर्च आता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
1985- भारत ने ऑपरेशन मेघदूत के जरिए एनजे-9842 के उत्तरी हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। यह वाटरशेड है यानी इससे आगे लड़ाई नहीं होगी।
1949- कराची समझौते के बाद भारत- पाक के बीच जम्मू-कश्मीर में संघर्ष विराम रेखा तथा नियंत्रण रेखा निर्धारित की गई। 1972 के शिमला समझौते के तहत प्वॉइंट एनजे-9842 तय हुआ था।
1972- जब शिमला समझौता हुआ तो सियाचिन के एनजे-9842 नामक स्थान पर सीमा तय हो गई। अगले कुछ वर्षों तक पाक के मानचित्रों में यह भाग इसके हिस्से में दिखाया गया। नवाज शरीफ ने पाक सरकार से यहां से सेना हटाने का आह्वान किया है।






