नई दिल्ली. आखिरकार अफजल गुरु को फांसी पर लटका दिया गया। ठीक उसी तरह जैसे 80 दिन पहले कसाब को फांसी दी गई थी। संसद पर हमले के दोषी अफजल को शनिवार सुबह 7.50 बजे फांसी दी गई और करीब 8:30 बजे
तिहाड़ के जेल नंबर तीन के पास दफन भी कर दिया गया। पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई थी। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किसका हाथ रहा जानिए...
सोनिया गांधी जिन्होंने मंजूरी दी
सोनिया गांधी ने 13 दिसंबर 2012 को गृहमंत्री से अफजल पर अपडेट मांगा था। उन्हें तेजी से मामला निपटाने को कहा था।
जयपुर चिंतन शिविर के बाद ही भाजपा के हाथ से हर वो मुद्दा छीनने की रणनीति बनी जो चुनाव में नुकसान पहुंचा सकती थी।
शुक्रवार को कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक में सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह से चर्चा के बाद शिंदे को हरी झंडी दे दी गई।