'सांसद बनने लायक नहीं सचिन, उन पर चल रहा मुकदमा'

चेन्न्ई. सचिन तेंडुलकर को राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने का मामला अदालत तक पहुंच गया है। इस मनोनयन के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इसमें बताया गया है कि उनके खिलाफ मदुरई के पास स्थित मेलूर कोर्ट में एक मुकदमा लंबित है। और, मांग की गई है कि इस मुकदमे का फैसला होने तक सचिन को सांसद के रूप में शपथ नहीं दिलाई जानी चाहिए।
यहां के एक वकील ए. बेनिट्टो ने सोमवार को याचिका दाखिल की है। उनका कहना है कि कोर्ट को सेक्रेटरी जनरल और डिप्टी चेयरमैन से यह पूछना चाहिए कि कैसे पूरी छानबीन किए बिना सचिन का नाम राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिया गया।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि मार्च 2010 में जमैका में एक पार्टी के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में मेलूर कोर्ट में सचिन पर मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके आधार पर सचिन को राज्यसभा का सदस्य होने का कोई अधिकार नहीं है। इस मामले पर सुनवाई 3 मई को हो सकती है।
गौरतलब है कि संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने भी सचिन तेंडुलकर के राज्यसभा में मनोनयन पर संवैधानिक प्रश्न उठाए हैं। सुभाष कश्यप ने सवाल किया है कि राज्यसभा में सिर्फ कला, समाजसेवा, विज्ञान या साहित्य क्षेत्र से आने वाली हस्तियों को ही मनोनीत किया जा सकता है। सुभाष कश्यप ने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि सचिन का मनोनयन गलत है या सचिन को सांसद नहीं होना चाहिए, लेकिन सरकार देश को बताए कि सचिन का मनोनयन किस कोटे से हुआ है। यदि सरकार मानती है कि क्रिकेट खेलना कला है या क्रिकेट का खिलाड़ी समाजसेवी है, तो फिर कोई सवाल ही नहीं उठता। इस पर केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने सचिन को समाजसेवी बताया।
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