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होश उड़ा देने वाली हाई प्रोफाइल पार्टियां

 
Source: डॉ. भारत अग्रवाल   |   Last Updated 12:54(17/11/11)
 
 
 
 

दिल्ली के माल्चा मार्ग में एक जगह होश उड़ा देने वाली हाई प्रोफाइल पार्टियां होती हैं। बड़े नेता, बड़े अफसर और बड़े बिजनेसवाले। लोग बताते हैं कि 25 साल पहले ऐसी पार्टियां बीआर चोपड़ा के फार्म हाउस पर होती थीं और उनकी वजह से राजीव गांधी को कुछ नेताओं व अफसरों की छुट्टी भी करनी पड़ी थी।

 

 जब प्रणब मुखर्जी को दिखा दी जबरन फिल्म

 

अतिव्यस्त प्रणब मुखर्जी के सामने एक बार ऐसी हालत बन चुकी है, जब फिल्म देखना भी उनकी ड्यूटी में शामिल था। हाल ही में एक कार्यक्रम में प्रणबदा से पूछा गया कि उन्होंने आखिरी बार थिएटर में जाकर कोई फिल्म कब देखी थी। प्रणबदा के मुंह से निकला- 25 साल पहले, लेकिन फिर उन्होंने याद करते हुए बताया कि सेंसर बोर्ड चाहता था कि फिल्म ‘रंग दे बसंती’ को (तत्कालीन) रक्षा मंत्री खुद देखें और तब प्रणबदा ने तीनों सेनाओं के अध्यक्षों के साथ वह फिल्म देखी थी। अब फाइनेंस मिनिस्ट्री के लिए जरूरी कोई फिल्म बनी ही नहीं है।

एक भवन बने न्यारा

 

केंद्र के तमाम मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालय के लिए अलग से बड़े भवन बनवाने का दांव ठोक रखा है। और ओरिजिनल आइडिया था जयराम रमेश का। भाई को लगता था कि कृषि भवन वाला दफ्तर रूरल डेवलपमेंट के लिहाज से उतना ‘रूरल’ नहीं लगता है, इसलिए दिल्ली में अलग से एक भव्य, विशाल और ‘असली’ ‘ग्रामीण भवन’ होना चाहिए। फिर क्या था? देखा-देखी नदी भवन, नाला भवन, जमीन भवन, आसमान भवन, हवा-पानी तमाम भवनों के दावे कूद पड़े हैं। देखते हैं क्या होता है।


कठोर मामला है

 

उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी की चुनावी किस्मत सही मायनों में कहा जाए तो चंद बॉडीगार्डस के हाथ में है। बात ये है कि मुलायम सिंह को सुनने की मशीन भूल जाने की आदत है। उसके बिना जैसा सुनाई दे पाता है, वैसा जवाब दे मारते हैं। नतीजा ये निकला कि विपक्षियों ने अफवाह उड़ा दी कि मुलायम सिंह को भूलने की बीमारी हो गई है और अफवाहें बढ़ते-बढ़ते मुलायम सिंह को राजनीति से ही बाहर करने की तरफ जाने लगीं। बहरहाल, अब मुलायम सिंह के बॉडीगार्डस को कठोर हिदायत दी गई है कि साब का हियरिंग ऐड कान पर लगा होना उनकी जिम्मेदारी होगी।

 

भगवान ने बचा लिया

 

ईश्वर ने बेंगलुरू में आडवाणी की लाज रख ली। जिद के कारण बेंगलुरू में आडवाणी की भ्रष्टाचार विरोधी सभा रखी गई। येदियुरप्पा अंदर हैं और सारी भाजपा की सांस अटकी हुई थी। लेकिन आडवाणी की सभा शुरू होते ही जमकर पानी बरसने लगा और कार्यक्रम ज्यादा लंबा खींचने की गुंजाइश ही नहीं रह गई। उधर कोर्ट से भी येदियुरप्पा को जमानत नहीं मिली। वरना वो भी मंच पर आडवाणी के साथ बैठते और बड़ी समस्या हो जाती। भगवान ने बचा लिया।  

 

सचमुच की ममता

 

ममता बनर्जी दिल्ली आईं। दिनभर का तूफानी कार्यक्रम। इधर मीटिंग, उधर मीटिंग। प्रेस वाले भी पीछे-पीछे सारा दिन दौड़ते रहे। ममतादी को जैसे ही इसका अहसास हुआ, उन्होंने फौरन सारे मीडिया वालों के लिए नाश्ते-खाने का प्रबंध करवाया और खुद चेक किया कि सबको फिश फ्राई मिली या नहीं। मेजबान बनते ही ममतादी की सारी ममता उफन पड़ती है।

 

जमीन-आसमान-पीएमओ

 

पुलक चटर्जी जब राजीव गांधी फाउंडेशन में हुआ करते थे, तब वह आम आदमी टाइप की बातें किया करते थे। फिर वह विश्व बैंक पहुंचे तो विश्व स्तर की बातें करने लगे। विश्व बैंक में दो साल गुजारने के बाद अब वह प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव हैं। शायद अब सारे अनुभवों का सही मिश्रण बनेगा। यानी सोच विश्व स्तर की, काम आम आदमी का।

 

बच गए गहलोत

 

‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ के रियलिटी शो के फाइनल का फैसला हो गया है और विजेता बने हैं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। आखिरी क्षणों का रीप्ले देखिए- आलाकमान नाराज था- सही। चार दिन इंतजार में बीते- सही। .. - सही। फिर.. - सही। आखिरी सवाल था- दो ऋणात्मक संख्याओं का गुणनफल धनात्मक हो जाता है- सही। और गहलोत अशोक हो गए। हर शोक से मुक्त। कुर्सी को.. कोई खतरा ना रहा..।

 

शाबास पीएमओ

 

पीएम के पोते दसवीं के छात्र हैं और नियमों के मुताबिक उन्हें एसपीजी सुरक्षा मिली हुई है। स्कूल की ट्रिप नैनीताल गई और वहां शरारत करने पर उन्हें बर्तन साफ करने की सजा मिली। स्कूल प्रिंसिपल को इसके लिए बाकायदा शाबासी दी गई है।

 

बड़े वाले तो वो हैं

 

किरण बेदी पर इल्जाम है कि वह बड़े दर्जे का किराया लेकर छोटे दर्जे में हवाई सफर करती थीं। कांग्रेस के एक पदाधिकारी हैं, जो एक ही सफर का किराया दो-दो तरफ से वसूलते हैं।

 

आएंगे सेन!

 

फिलहाल कर्नाटक हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस विक्रमजीत सेन सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं। वहां से जस्टिस जोसेफ जनवरी में रिटायर हो रहे हैं। जोसेफ और सेन दोनों ईसाई हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाईकोर्ट के तीन जज पहले ही हैं और जस्टिस विक्रमजीत सेन भी मूलत: दिल्ली हाईकोर्ट के ही हैं।

 

होगी पूछताछ!

 

कैश फॉर वोट मामले में शायद अगले सप्ताह दिल्ली पुलिस अरुण जेटली और आडवाणी से पूछताछ करे।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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